कहते हैं- इंसान उम्र नहीं तजरबा से बड़ा होता है। जो शायर अपने तजरबे को जितनी ख़ूबसूरती से क्राफ़्ट में…
मार्केज़ एक बीते हुए जीवन को फिर से सृजित करने की ज़िद करते हुए लिखते रहे
आज गाब्रिएल गार्सिया मार्केज़ का जन्मदिन है. कुछ साल पहले उनको याद करते हुए यह लेख शिव प्रसाद जोशी ने…
मार्केज़ की बताई जाने वाली कविता ‘द पपेट’ हिंदी में
साहित्य के नजरिये को बदल कर रख देने वाले लेखक गैब्रिएल गार्सिया मार्केज़ का आज जन्मदिन है. उनके असाधारण गद्य…
नीलगाय इज़ नॉट ए कूल टॉपिक!
ट्रेन से बिहार जाने की मेरी यादों में यह भी है कि ट्रेन जब सुबह के समय यूपी बिहार की…
राकेश रंजन की कविता ‘बनारस में’
इस साल अन्तरराष्ट्रीय पुस्तक मेले दिल्ली में राधाकृष्ण प्रकाशन से राकेश रंजन का का कविता संग्रह आया ‘दिव्य कैदखाने में’.…
मार्केज़ की कहानी ‘सफ़ेद बर्फ़ पर लाल खून की धार’
कल हमने गाब्रिएल गार्सिया मार्केज़ की बातचीत पढ़ी थी. आज उनकी एक कहानी का अनुवाद पढ़ते हैं. विजय शर्मा जी…
ज़िन्दगी लाइव: फंतासी झूठ नहीं, संभावना है!
किताबों के बाजार की सबसे बड़ी ब्यूटी यह होती है कि जिस किताब को लेखक-प्रकाशक चलाना चाहता है वह अक्सर…
रेणु जी के ‘मैला आँचल’ के अंश-पाठ का ऑडियो-वीडियो
आज फणीश्वरनाथ रेणु का जन्मदिन है. उनके उपन्यास ‘मैला आँचल’ के बारे में अनेक विद्वानों का यह मानना है कि…
शर्मिला बोहरा जालान की कहानी ‘एक अलग उजास में’
शर्मिला बोहरा जालान नए दौर की लेखिका हैं लेकिन पुराने शिल्प में सिद्धहस्त हैं. उनकी यह कहानी कैंसर से मरती…
शोभा शामी की डायरी से एक अंश
शोभा शामी बंगलौर के एक मीडिया ऑर्गनाईजेशन में सोशल मीडिया एनलिस्ट है. इससे पहले उन्होंने दिल्ली में नेटवर्क 18, अमर…



