धर्मवीर नहीं रहे. सन 2000 के आसपास उनकी पुस्तक ‘कबीर के आलोचक’ ने हिंदी आलोचना को सर के बल खड़ा…
औरतों की संगीतमय दुनिया ‘समरथ’
हुआ यूँ कि जानी मानी थिएटर आर्टिस्ट/लेखिका विभा रानी ब्रेस्ट कैंसर की शिकार हुईं और अपनी मजबूत जिजीविषा के कारण…
साहिर ने सेल्युलाइड के लिए भी वही लिखा जो कागज़ पर लिखते आए थे
कल महान शायर, फिल्मों के सबसे सफल गीतकारों में एक साहिर लुधियानवी का जन्मदिन था. उनके एक दोस्त जोए अंसारी…
मनीषा कुलश्रेष्ठ की कहानी ‘रंग रूप रस गंध’
होली आने वाली है. वरिष्ठ लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ की यह कहानी वृन्दावन की होली को लेकर है. पढियेगा- मॉडरेटर =====================================================…
मैं टूटा तो तुम ने मुझ को गले लगाया
औरत को लेकर हर किसी का अपना एक नज़रिया होता है। होना भी चाहिए। यहाँ तक कि ख़ुद औरतों का…
स्त्री और पुरुष सामाजिक ग़ैर बराबरी को ख़त्म कर अपने हक़ों के साथ रह पाएंगे?
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विभावरी का यह लेख कुछ महत्वपूर्ण सवालों को उठाने वाला है- मॉडरेटर ===================================================== ऐसे समय में…
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस और ‘वोटर माता की जय’
हिंदी का दुर्भाग्य है कि स्त्री लेखन के नाम पर महज कविता-कहानियों की चर्चा होती है. किसी नए विषय पर…
एक हाउस वाइफ का विमेंस डे
सभी को विमेंस डे की शुभकामनाएँ- दिव्या विजय =========================== बे-दम हुए बीमार दवा क्यों नहीं देते तुम अच्छे मसीहा हो…
थूका है मैनें ख़ून हमेशा मज़ाक़ में
हिंदी सिनेमा के दर्शक मुख्य रूप से दो तरह के लोग हैं। एक वो, जो पॉपुलर सिनेमा को पसंद करते…
‘मैला ‘आँचल’ बड़ी रचना है या ‘परती परिकथा’
फणीश्वरनाथ रेणु और मार्केज़ दोनों के जन्मदिन आसपास पड़ते हैं. दोनों के लेखन में एक समानता थी कि दोनों ने…



