कैनेडियन लेखिका मारग्रेट एटवुड की कुछ कविताएँ

मारग्रेट एटवुड को आम तौर पर ‘ब्लाइंड असैसिन्स’ उपन्यास के लिए जाना जाता है. जिसके ऊपर उनको बुकर पुरस्कार मिला था. उनके उपन्यासों को पांच बार बुकर पुरस्कार के लिए शॉर्टलिस्ट किया जा चुका है. 77 साल की इस कैनेडियन लेखिका ने कविताएँ भी लिखी हैं. आज कुछ कविताएँ, जिनका अनुवाद प्रतिमा दवे ने किया है- त्रिपुरारि

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चौखट

फर्श के बीचोंबीच
यह खिड़की बनाई है मैंने
चौखटों से तो बिलकुल
खिड़की ही लगती है

इसमें से दिखती है मुझे एक सड़क,
फुटपाथ और आसमान का नीला टुकड़ा
जहाँ होम मूवी के कम्पन की तरह
चिड़ियाँ उडती हैं पंख झटकारते हुए

दीखते हैं वे मकान जहाँ कभी मैं रही थी
मैगज़ीनों के फाड़े हुए पन्ने
एक पर एक तहाए रखे हैं

गत्तों से बने अजीब से नाटे मेरे शरीर
मेरी तरफ पीठ किए लॉन में
एक पर एक टिके पड़े हैं.

मुझे यहाँ कौन छोड़ गया
और यह कैंची किसने थमाई मुझे
मैं तो हमेशा यहाँ से बाहर निकलने का
ख़्वाब देखती हूँ
पर, कोई दरवाज़ा ही नहीं खुलता.

मैं माफ़ करूँ भी तो किसे करूँ? 

तुम मेरा हाथ थामते हो

तुम मेरा हाथ थामते हो
और किसी बुरी फिल्म की
याद ताज़ा हो उठती है
ऐसा हमेशा ही क्यों होता है
पता नहीं कैसा खिंचाव है  यह

वाल्ट्ज़ की धुन पर थिरकते हैं हम
हवा बोझिल है बासी सूक्तियों से
गमलों में लगे पाम की अंतहीन
कतार के पीछे मिलते हैं हम
और तुम हमेशा ही ग़लत खिड़की से अंदर आते हो.

और लोग अब जाने को हैं
पर, मैं तो आखिर तक रुकूंगी
आखिर पैसे दिए हैं मैंने
देखूंगी इस सबका अंजाम

संयोग से मिले बाथटब  में नहाते हुए
धुंए  व पिघले सेल्युलॉइड के साथ- साथ
मैं तुम्हारे एहसास की केंचुल भी उतार फेंकती हूँ.

पर, अब इस सच से जूझना है मुझे
कि नशे बाज़ हो गई हूँ मैं
पॉपकॉर्न और फटे मखमल की गंध
हफ़्तों पीछा नहीं छोड़ती मेरा. 

परछाई की आवाज़

मेरी परछाई ने पूछा मुझसे
आखिर बात क्या है

क्या चाँद की नर्म गर्माहट
काफी नहीं है तुम्हारे लिए
जो तुम्हें किसी और जिस्म की ज़रुरत पड़ती है

लिज़लिज़ा है जिसका चूमना

पिकनिक टेबलों के चारों ओर
चमकते गुलाबी हाथ थामे हैं सैंडविचें
जो टूट गईं हैं दूर से लाने के कारण
और इस मीठे पल पर मक्खियाँ भिनभिना रही हैं

तुम्हें पता है उन टोकरियो में क्या है?

बच्चों की बंदूकों की गड़गड़ाहट से
वहां पेड़ नीचे झुक रहे हैं
छोड़ दो उन्हें उनके हाल पर
वे अपना खेल खेल रहे हैं.

मैं देती हूँ उन्हें दाना पानी

तुम क्यों चुप हो
क्या तुम्हारी नसों में बहते हुए
सारे शब्द चुक गए हैं.

एक लाल कमीज़
(रुथ के लिए)

(1)

मैं और मेरी बहन
सिल रहें हैं एक कमीज़ मेरी बेटी के लिए
टेबल के पार से एक दूसरे को
कैंची थमाते हुए
वह पिन लगाती है, मैं तुरपन करती हूँ.

बच्चों को लाल रंग नहीं पहनना चाहिए
किसी ने कभी कहा था मुझसे
जवाँ लड़कियों को तो बिलकुल भी नहीं

कुछ देशों में यह मौत का रंग है
कहीं इश्क के उफान का
कहीं युद्ध तो कहीं आक्रोश का
और कहीं खून के बलिदान का

एक लड़की को पर्दादार होना चाहिए
पानी पर चाँद की बेजान सफ़ेद परछाई सा
निहायत ही मासूम

उसे चुप रहना चाहिए
लाल जूते- मोज़े व नाच से दूर
लाल जूतों में नाचना तो मौत का पैगाम है.

(2)

पर इस लाल रंग पर तो मेरा पैदाइशी हक़ है
यह रंग है सिमटी हुई खुशियों
और फैले हुए दुखों का
यही तो जोड़ता है हमें एक दूसरे से

टेबल पर झुके हमारे शरीर
धरती के गुरुत्वाकर्षण से
नीचे की ओर खिंच रहे हैं

हमारे शब्दों व कहानियों से
यह कमीज़ दागदार हो गई है
पीछे दीवारों पर हमारी परछाईयाँ
लुका छिपी का खेल खेल रही हैं

यह जुलूस है हमारी
बूढ़ी खुरदुरी माँओं का

अँधेरी रात से पहले
यह चाँद की आखिरी झिलमिल है
पुराने दस्तानों की सिकुड़न भरी माँओं की जिंदगियां
अपनी बेटी को अपना हुनर सौपतीं हैं
खून का यह लम्बा धागा अभी टूटा नहीं है.

(3)

आओ सुनाती हूँ मैं कहानी
एक बूढी औरत की

पहले वह तुम्हारा शरीर बुनती है
फिर तुम्हारी आत्मा

फिर अनजाने लोगों की नफरत
और डर झेलती है

यह वह टोह्नी है
जिसे तुम दिन के उजाले में जलाते हो
और रात के अंधियारे में चुपके से
सलाह लेते हो
प्यार में मिले धोखे का इलज़ाम
उसके सर  थोपते हो
वह अपना रूप बदल सकती है
तुम्हारी माँ की तरह वह भी फर में लिपटी है
जब सारे आसरे टूट जाते हैं
तो टिन के सितारों जैसी छोटे- छोटे हाथ पाँव वाली
इस काली मैडोना को
लाल मोम बत्ती जलाकर
अपने सारे दुःख सौंप देते हो .

(4)

जनवरी का यह भीगा उदास दिन है
मेरी बच्ची , तुम्हारे लिए मैं सिर्फ
एक कमीज़ बनाऊंगी और ताबीज़ टोटका
किस्सा नहीं गढ़ूंगी
पर जनवरी के इस मौसम में
किस्से टोटके बर्फ की तरह
चारों ओर से घेरते हैं
कुछ दोस्ताना होते हैं
साथ ही वायरस की तरह शक्तिशाली भी
उन कुँआरी परियों की तरह
जो पिन की नोक पर नाचती हैं
या उन  वेश्याओं के दिलों की तरह
जिन्हें खालिस सोना होने की वजह से
जड़ से उखाड़ दिया गया है
या फिर उन काल्पनिक रत्नों की तरह भारी
जो यहूदियों के सिरों को एक झटके से तोड़ देते थे.

हो सकता है यह झूठ हो कि
एक मिथक दूसरे मिथक को निरस्त करता है
फिर भी कमीज़ के कोने में जहाँ कोई भी देख नहीं पायेगा
अपनी विरासत के तौर पर
अपना  छोटा सा टोटका मैंने काढ़ दिया है

जामुनी फूलों व मोतियों के बटन वाली
लाल कमीज़ अब पूरी हो गई है
और मेरी बिटिया ने पहन भी ली है
चिपकाए है सीने से लाल रंग
जो बेमानी है उसके लिए
सिवाय उसकी चटक व गर्मी के

अपनी लाल बाहें झुलाते हुए
नंगे पाँव फर्श पर दौड़ लगा रही है
इस नए खेल में खिलखिलाकर
हमसे दूर भाग रही है

और हवा अचानक ही नारों से विस्फोटक हो गई है.

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