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जानकी पुल – A Bridge of World Literature

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हाथी के पीछे भौंकते कुत्ते

September 13, 20121 mins0
हिंदी में गंभीर विमर्श का माहौल खत्म होता जा रहा है, मर्यादाएं टूटती जा रही हैं. अभी…
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    हाथी के पीछे भौंकते कुत्ते

    September 13, 20121 mins17
    हिंदी में गंभीर विमर्श का माहौल खत्म होता जा रहा है, मर्यादाएं टूटती जा रही हैं. अभी…
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    जो राष्ट्रीय नहीं है वह क्या अंतरराष्ट्रीय होगा

    September 13, 20121 mins109
    कल हिंदी दिवस है. हिंदी के आह-वादी और वाह-वादी विमर्श से हटकर मैंने कुछ लिखा है. यह…
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      हर शहर इसी तरह बहुरुपियों का शहर हुआ करता है

      September 12, 20121 mins148
      ‘दस्तक’ एक किताब है लेकिन जरा हटके है. इसकी लेखिका यशोदा सिंह एक ऐसी लेखिका हैं जो…
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        लेखन एक जागृत स्वप्न है

        September 11, 20121 mins0
        राजेश जोशी के ये विचार प्रीति सिंह परिहार से बातचीत पर आधारित हैं. राजेश जोशी के लिए…
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          लेखन एक जागृत स्वप्न है

          September 11, 2012August 6, 20251 mins10
            राजेश जोशी के ये विचार प्रीति सिंह परिहार से बातचीत पर आधारित हैं. राजेश जोशी के…
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          किताबें अंग्रेजी की लोकप्रियता हिंदी में

          September 10, 20121 mins4
           ट्रेन हो या बस या फ्लाइट, इन दिनों हर तरफ युवाओं को उपन्यास, या कोई रोचक टाइटल…
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            भुवनेश्वर की कहानी ‘डाकमुंशी’

            September 8, 20121 mins106
            जन्म-शताब्दी के बाद ही सही हिंदी अभिशप्त लेखक भुवनेश्वर की ओर हिंदी समाज का ध्यान गया. राजकमल…
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              ‘कान्हा सान्निध्य’ पर वरिष्ठ कवि राजेश जोशी का पत्र

              September 6, 20121 mins167
              कान्हा प्रकरण पर विष्णु खरे के विवादास्पद लेख के सन्दर्भ में वरिष्ठ कवि राजेश जोशी ने यह…
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                उनके पास ज्‍यादा काम नहीं है तभी तो लिखते हैं!

                September 5, 20121 mins0
                हमारे समाज, खासकर हिंदी समाज में लेखक नाम की संज्ञा अब भी कोई खास प्रभाव नहीं पैदा…
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