प्रमोद द्विवेदी की कहानियों की विषयवस्तु और भाषा दोनों का अपना ही अन्दाज़ है। ‘जनसत्ता’ के फ़ीचर संपदक रहे इस…
इजाडोरा की प्रेमकथा की काव्यात्मक समीक्षा
यतीश कुमार ने पुस्तकों की काव्यात्मक समीक्षा की एक शैली विकसित की। आज लम्बे समय के बाद उन्होंने पुनः एक…
‘कुछ पाने की ज़िद’ है मनोज बाजपेयी की संघर्ष गाथा
वरिष्ठ पत्रकार पीयूष पांडे ने प्रसिद्ध अभिनेता मनोज बाजपेयी की जीवनी लिखी है। पेंगुइन रैंडम हाउस से प्रकाशित इस जीवनी…
उज़्मा कलाम की कहानी ‘बिन शौहर’
आज पढ़िए उज़्मा कलाम की कहानी। उज़्मा ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया और दिल्ली विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की है और…
नमन नारायण की कहानी ‘टाइमपास’
21 वर्षीय नमन नारायण की टिप्पणियाँ हम पहले भी जानकी पुल पर पढ़ते रहे हैं। इस बार उसकी एक छोटी…
कोरोना-काल में मातृ-साया की कहानी बयां करती ‘आंधारी’
प्रसिद्ध लेखिका नमिता गोखले के उपन्यास ‘द ब्लाइंड मैट्रीआर्क’ के हिंदी अनुवाद ‘आंधारी’ पर यह टिप्पणी लिखी है युवा लेखक-पत्रकार ने।…
विमलेश त्रिपाठी का स्तम्भ एक गुमनाम लेखक की डायरी-2
आज पढ़िए युवा कवि विमलेश त्रिपाठी की आत्मकथा की दूसरी किस्त। वे जानकी पुल के लिए यह साप्ताहिक स्तम्भ लिख…
पहले प्रेम की दारुण मनोहारी वेदना का आख्यान : ‘कॉल मी बाई योर नेम’ और ‘कोबाल्ट ब्लू’
हाल में आई फ़िल्म ‘कोबाल्ट ब्लू’ और तक़रीबन पाँच साल पुरानी फ़िल्म ‘कॉल मी बाई योर नेम’ पर यह टिप्पणी…
विशाखा मुलमुले की कुछ कविताएँ
विशाखा मुलमुले समकालीन कविता का जाना-पहचाना नाम है। आज उनकी कुछ कविताएँ पढ़िए- ================= 1 ) जाने तक के…
कोबाल्ट ब्लू : लेबलिंग से पूरी तरह से गुरेज
नेटफलिक्स पर एक फिल्म है ‘कोबाल्ट ब्लू’, इसकी बहुत अच्छी समीक्षा लिखी है किंशुक गुप्ता ने। किंशुक गुप्ता मौलाना आज़ाद…



