फ़िल्म डायरेक्टर विशाल भारद्वाज की कविता

विशाल भारद्वाज निर्देशित फ़िल्म ‘रंगून’ हाल में रिलीज़ हुई और बहुत चर्चा में है। जानकीपुल पर भी कई रिव्यू पढ़ा जा चुका है। लेकिन कम लोग जानते हैं कि विशाल कविताएँ भी लिखते हैं। जल्द ही उनकी कविताओं का संग्रह हमारे बीच होगा। फ़िलहाल पढ़ते हैं विशाल भारद्वाज की कविता, जो उन्होंने अपनी वाइफ़ रेखा भारद्वाज के लिखा है – संपादक

अकेला छोड़ के घर में न मुझको जाया करो
ऑन होता नहीं है टीवी तुम न देखो तो
और ताला भी कहाँ खुलता है अलमारी का
तुम्हारे जाते ही नल को ज़ुकाम होता है
टपकने लगता है टप टप ये बदतमीज़ मुआ
हवा से मिल के परदे रात भर डराते हैं
तमाम बत्तियाँ एसी भी और इंटरनेट
जाम हो जाते हैं सारे के सारे बेवजह
बेवजह चलने लगते हैं तुम्हारे लौटने पे
मेरे ख़िलाफ़ कई साज़िशें सी होती हैं
अकेला छोड़ के घर में मुझको जाया करो

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