Meritking Giriş: Meritking Spor BahisleriMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Bonus Ve KampanyalarMeritking Giriş: Meritking Güvenilir Mi, Meritking Bonus Ve KampanyalarMarsbahis Giriş: Marsbahis Giriş Adresi, Marsbahis Mobilden Giriş 2026Mavibet Giriş: Mavibet Spor Bahisleri, Mavibet Casino Ve Slot OyunlarıMeritking Giriş: Meritking Spor BahisleriMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Bonus Ve KampanyalarMeritking Giriş: Meritking Giriş Adresi, Meritking Casino Ve Slot OyunlarıMarsbahis Giriş: Marsbahis Güvenilir Mi, Marsbahis Spor BahisleriMavibet Giriş: Mavibet Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMeritking Giriş: Meritking Spor BahisleriMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Mobilden Giriş 2026Meritking Giriş: Meritking Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMarsbahis Giriş: Marsbahis Spor BahisleriMavibet Giriş: Mavibet Giriş Adresi, Mavibet Güvenilir MiMeritking Giriş: Meritking Giriş Adresi, Meritking Casino Ve Slot OyunlarıMarsbahis Giriş: Marsbahis Güvenilir Mi, Marsbahis Spor BahisleriMavibet Giriş: Mavibet Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMeritking Giriş: Meritking Spor Bahisleri, Meritking Casino Ve Slot OyunlarıMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Bonus Ve KampanyalarMeritking Giriş: Meritking Canlı Destek Ve İletişimMarsbahis Giriş: Marsbahis Casino Ve Slot OyunlarıMavibet Giriş: Mavibet Bonus Ve KampanyalarMeritking Giriş: Meritking Spor Bahisleri, Meritking Giriş AdresiMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir MiMeritking Giriş: Meritking Canlı Destek Ve İletişimMarsbahis Giriş: Marsbahis Casino Ve Slot Oyunları, Marsbahis Spor BahisleriMavibet Giriş: Mavibet Bonus Ve Kampanyalar, Mavibet Giriş AdresiMeritking Giriş: Meritking Güvenilir Mi, Meritking Bonus Ve KampanyalarMarsbahis Giriş: Marsbahis Giriş Adresi, Marsbahis Mobilden Giriş 2026Mavibet Giriş: Mavibet Spor BahisleriMeritking Giriş: Meritking Giriş Adresi, Meritking Mobilden Giriş 2026Marsbahis Giriş: Marsbahis Güvenilir Mi, Marsbahis Bonus Ve KampanyalarMavibet Giriş: Mavibet Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMeritking Giriş: Meritking Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMarsbahis Giriş: Marsbahis Spor Bahisleri, Marsbahis Casino Ve Slot OyunlarıMavibet Giriş: Mavibet Giriş Adresi, Mavibet Mobilden Giriş 2026Meritking Giriş: Meritking Canlı Destek Ve İletişimMarsbahis Giriş: Marsbahis Casino Ve Slot OyunlarıMavibet Giriş: Mavibet Bonus Ve KampanyalarMeritking Giriş: Meritking Giriş AdresiMarsbahis Giriş: Marsbahis Güvenilir MiMavibet Giriş: Mavibet Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMeritking Giriş: Meritking Güvenilir Mi, Meritking Giriş AdresiMarsbahis Giriş: Marsbahis Giriş Adresi, Marsbahis Bonus Ve KampanyalarMavibet Giriş: Mavibet Spor Bahisleri, Mavibet Casino Ve Slot OyunlarıMeritking Giriş: Meritking Spor Bahisleri, Meritking Casino Ve Slot OyunlarıMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Bonus Ve KampanyalarMeritking Giriş: Meritking Spor Bahisleri, Meritking Casino Ve Slot OyunlarıMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Bonus Ve KampanyalarMeritking Giriş: Meritking Güvenilir Mi, Meritking Bonus Ve KampanyalarMarsbahis Giriş: Marsbahis Giriş Adresi, Marsbahis Mobilden Giriş 2026Mavibet Giriş: Mavibet Spor BahislerikalitebetgrandpashabetholiganbetjojobetholiganbetholiganbetextrabetAntalya EscortAntalya Escort BayanAntalya Escort BayanMeritking Giriş: Meritking Spor Bahisleri, Meritking Casino Ve Slot OyunlarıMarsbahis Giriş: Marsbahis Para Yatırma Ve Çekme İşlemleriMavibet Giriş: Mavibet Güvenilir Mi, Mavibet Bonus Ve KampanyalarAntalya Escort BayanAntalya EscortAntalya EscortlarAntalya EscortSüratbetSüratbet girişSüratbetCasinoroyalCasinoroyal girişCasinoroyalHarbiwinHarbiwin girişHarbiwinAresbetAresbet girişAresbetPolobetPolobet girişPolobetBetwildBetwild girişBetwildMavibetMavibet girişMavibetGalabetGalabet girişGalabetBahislionBahislion girişBahislionBetcioBetcio girişBetcioBetsilinBetsilin girişBetsilinEgebetEgebet girişEgebetKavbetKavbet girişKavbetRoketbetRoketbet girişRoketbetMarsbahisMarsbahis girişMarsbahisMeritkingMeritking girişMeritkingHoliganbetHoliganbet girişHoliganbetElitbahisElitbahis girişElitbahisHarbiwinHarbiwin girişHarbiwinCasinoroyalCasinoroyal girişCasinoroyalKalebetKalebet girişKalebetMisliwinMisliwin girişMisliwinRekorbetRekorbet girişRekorbetSetrabetSetrabet girişSetrabetSüratbetSüratbet girişSüratbetTimebetTimebet girişTimebetKralbetKralbet girişKralbetWinxbetWinxbet girişWinxbetHoliganbetHoliganbet girişHoliganbet

मदर्स डे और दिनकर की ‘रश्मिरथी’

मदर्स डे के दिन रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कृति ‘रश्मिरथी’ की याद भी आ जाती है. खासकर उसका पांचवां सर्ग, जिसमें कर्ण और कुंती का संवाद है. अवैध संतान होने की पीड़ा झेलता कर्ण और उसकी माँ कुंती, जिसने उसको कभी बेटा नहीं कहा. ‘रश्मिरथी’ के पांचवें सर्ग में वह महाभारत के युद्ध से एक दिन पहले कर्ण को यह बताने आई है कि वह उसकी माँ हैं और इसलिए उसको कौरवों का साथ छोड़कर पांडवों के साथ आ जाना चाहिए क्योंकि वही उसके असली भाई है. माँ-बेटे का यह द्वंद्व पांचवें सर्ग में बहुत अच्छी तरह से उभर कर आया है. मुझे याद है कि जब मैं छोटा था तो मेरे बड़े बाबा बहुत बीमार थे. अपने अंतिम दिनों में वे मुझे ‘रश्मिरथी’ का यह सर्ग पढने के लिए कहते थे. मैं पढता था और वे आँखें बंद किये सुनते थे. अद्भुत काव्यात्मकता भी है दिनकर की इस कृति में. उसी का एक अंश प्रस्तुत है- मॉडरेटर

==============

आहट पाकर जब ध्यान कर्ण ने खोला,
कुन्ती को सम्मुख देख वितन हो बोला,
‘‘पद पर अन्तर का भक्ति-भाव धरता हूँ,
राधा का सुत मैं, देवि ! नमन करता हूँ

‘‘हैं आप कौन ? किसलिए यहाँ आयी हैं ?
मेरे निमित्त आदेश कौन लायी हैं ?
यह कुरूक्षेत्र की भूमि, युद्ध का स्थल है,
अस्तमित हुआ चाहता विभामण्डल है।

‘‘सूना, औघट यह घाट, महा भयकारी,
उस पर भी प्रवया आप अकेली नारी।
हैं कौन ? देवि ! कहिये, क्या काम करूँ मैं ?
क्या भक्ति-भेंट चरणों पर आन धरूँ मैं ?

सुन गिरा गूढ़ कुन्ती का धीरज छूटा,
भीतर का क्लेश अपार अश्रु बन फूटा।
विगलित हो उसने कहा काँपते स्वर से,
‘‘रे कर्ण ! बेध मत मुझे निदारूण शर से।

‘‘राधा का सुत तू नहीं, तनय मेरा है,
जो धर्मराज का, वही वंश तेरा है।
तू नहीं सूत का पुत्र, राजवंशी है,
अर्जुन-समान कुरूकुल का ही अंशी है।

‘‘जिस तरह तीन पुत्रों को मैंने पाया,
तू उसी तरह था प्रथम कुक्षि में आया।
पा तुझे धन्य थी हुई गोद यह मेरी,
मैं ही अभागिनी पृथा जननि हूँ तेरी।

‘‘पर, मैं कुमारिका थी, जब तू आया था,
अनमोल लाल मैंने असमय पाया था।
अतएव, हाय ! अपने दुधमुँहे तनय से,
भागना पड़ा मुझको समाज के भय से

‘‘बेटा, धरती पर बड़ी दीन है नारी,
अबला होती, सममुच, योषिता कुमारी।
है कठिन बन्द करना समाज के मुख को,
सिर उठा न पा सकती पतिता निज सुख को।

‘‘उस पर भी बाल अबोध, काल बचपन का,
सूझा न शोध मुझको कुछ और पतन का।
मंजूषा में धर तुझे वज्र कर मन को,
धारा में आयी छोड़ हृदय के धन को।

‘‘संयोग, सूतपत्नी ने तुझको पाला,
उन दयामयी पर तनिक न मुझे कसाला।
ले चल, मैं उनके दोनों पाँव धरूँगी,
अग्रजा मान कर सादर अंक भरूँगी।

‘‘पर एक बात सुन, जो कहने आयी हूँ,
आदेश नहीं, प्रार्थना साथ लायी हूँ।
कल कुरूक्षेत्र में जो संग्राम छिड़ेगा,
क्षत्रिय-समाज पर कल जो प्रलय घिरेगा।

‘‘उसमें न पाण्डवों के विरूद्ध हो लड़ तू,
मत उन्हें मार, या उनके हाथों मत तू।
मेरे ही सुत मेरे सुत को ह मारें;
हो क्रुद्ध परस्पर ही प्रतिशोध उतारें।

‘‘यह विकट दृश्य मुझसे न सहा जायेगा,
अब और न मुझसे मूक रहा जायेगा।
जो छिपकर थी अबतक कुरेदती मन को,
बतला दूँगी वह व्यथा समग्र भुवन को।

भागी थी तुझको छोड़ कभी जिस भय से,
फिर कभी न हेरा तुझको जिस संशय से,
उस जड़ समाज के सिर पर कदम धरूँगी,
डर चुकी बहुत, अब और न अधिक डरूँगी।

‘‘थी चाह पंक मन को प्रक्षालित कर लूँ,
मरने के पहले तुँझे अंक में भर लूँ।
वह समय आज रण के मिस से आया है,
अवसर मैंने भी क्या अद्भुत पाया है !

बाज़ी तो मैं हार चुकी कब हो ही,
लेकिन, विरंचि निकला कितना निर्मोही !
तुझ तक न आज तक दिया कभी भी आने,
यह गोपन जन्म-रहस्य तुझे बतलाने।

‘‘पर पुत्र ! सोच अन्यथा न तू कुछ मन में,
यह भी होता है कभी-कभी जीवन में,
अब दौड़ वत्स ! गोदी में वापस आ तू,
आ गया निकट विध्वंस, न देर लगा तू।

‘‘जा भूल द्वेष के ज़हर, क्रोध के विष को,
रे कर्ण ! समर में अब मारेगा किसको ?
पाँचों पाण्डव हैं अनुज, बड़ा तू ही है
अग्रज बन रक्षा-हेतु खड़ा तू ही है।

‘‘नेता बन, कर में सूत्र समर का ले तू,
अनुजों पर छत्र विशाल बाहु का दे तू,
संग्राम जीत, कर प्राप्त विजय अति भारी।
जयमुकुट पहन, फिर भोग सम्पदा सारी।

‘‘यह नहीं किसी भी छल का आयोजन है,
रे पुत्र। सत्य ही मैंने किया कथन है।
विश्वास न हो तो शपथ कौन मैं खाऊँ ?
किसको प्रमाण के लिए यहाँ बुलवाऊँ ?

‘‘वह देख, पश्चिमी तट के पास गगन में,
देवता दीपते जो कनकाभ वसन में,
जिनके प्रताप की किरण अजय अद्भूत है,
तू उन्हीं अंशुधर का प्रकाशमय सुत है।’’
रूक पृथा पोंछने लगी अश्रु अंचल से,
इतने में आयी गिरा गगन-मण्डल से,
‘‘कुन्ती का सारा कथन सत्य कर जानो,
माँ की आज्ञा बेटा ! अवश्य तुम मानो।’’

यह कह दिनेश चट उतर गये अम्बर से,
हो गये तिरोहित मिलकर किसी लहर से।
मानो, कुन्ती का भार भयानक पाकर,
वे चले गये दायित्व छोड़ घबराकर।

डूबते सूर्य को नमन निवेदित करके,
कुन्ती के पद की धूल शीश पर धरके।
राधेय बोलने लगा बड़े ही दुख से,
‘‘तुम मुझे पुत्र कहने आयीं किस मुख से ?

‘‘अपना खोया संसार न तुम पाओगी,
राधा माँ का अधिकार न तुम पाओगी।
छीनने स्वत्व उसका तो तुम आयी हो,
पर, कभी बात यह भी मन में लायी हो ?

‘‘उसको सेवा, तुमको सुकीर्ति प्यारी है,
तु ठकुरानी हो, वह केवल नारी है।
तुमने तो तन से मुझे काढ़ कर फेंका,
उसने अनाथ को हृदय लगा कर सेंका।

‘‘उमड़ी न स्नेह की उज्जवल धार हृदय से,
तुम सुख गयीं मुझको पाते ही भय से।
पर, राधा ने जिस दिन मुझको पाया था,
कहते हैं, उसको दूध उतर आया था।

‘‘तुमने जनकर भी नहीं पुत्र कर जाना,
उसने पाकर भी मुझे तनय निज माना।
अब तुम्हीं कहो, कैसे आत्मा को मारूँ ?
माता कह उसके बदलें तुम्हें पुकारूँ ?

‘‘अर्जुन की जननी ! मुझे न कोई दुख है,
ज्यों-त्यों मैने भी ढूँढ लिया निज सुख है।
जब भी पिछे की ओर दृष्टि जाती है,
चिन्तन में भी यह बात नहीं आती है।

‘‘आचरण तुम्हारा उचित या कि अनुचित था,
या असमय मेरा जन्म न शील-विहित था !
पर एक बात है, जिसे सोच कर मन में,
मैं जलता ही आया समग्र जीवन में,

‘‘अज्ञातशीलकुलता का विघ्न न माना,
भुजबल को मैंने सदा भाग्य कर जाना।
बाधाओं के ऊपर चढ़ धूम मचा कर,
पाया सब-कुछ मैंने पौरूष को पाकर।

‘‘जन्मा लेकर अभिशाप, हुआ वरदानी,
आया बनकर कंगाल, कहाया दानी।
दे दिये मोल जो भी जीवन ने माँगे,
सिर नहीं झुकाया कभी किसी के आगे।

‘‘पर हाय, हुआ ऐसा क्यों वाम विधाता ?
मुझ वीर पुत्र को मिली भीरू क्यों माता ?
जो जमकर पत्थर हुई जाति के भय से,
सम्बन्ध तोड़ भगी दुधमुँहे तनय से।

‘‘मर गयी नहीं वह स्वयं, मार सुत को ही,
जीना चाहा बन कठिन, क्रुर, निर्मोही।
क्या कहूँ देवि ! मैं तो ठहरा अनचाहा,
पर तुमने माँ का खूब चरित्र निबाहा।

‘‘था कौन लोभ, थे अरमान हृदय में,
देखा तुमने जिनका अवरोध तनय में ?
शायद यह छोटी बात-राजसुख पाओ,
वर किसी भूप को तुम रानी कहलाओ।

‘‘सम्मान मिले, यश बढ़े वधूमण्डल में,
कहलाओ साध्वी, सती वाम भूतल में।
पाओ सुत भी बलवान, पवित्र, प्रतापी,
मुझ सा अघजन्मा नहीं, मलिन, परितापी।

‘‘सो धन्य हुईं तुम देवि ! सभी कुछ पा कर,
कुछ भी न गँवाया तुमने मुझे गँवा कर।
पर अम्बर पर जिनका प्रदीप जलता है,
जिनके अधीन संसार निखिल चलता है

‘‘उनकी पोथी में भी कुछ लेखा होगा,
कुछ कृत्य उन्होंने भी तो देखा होगा।
धारा पर सद्यःजात पुत्र का बहना,
माँ का हो वज्र-कठोर दृश्य वह सहना।

‘‘फिर उसका होना मग्न अनेक सुखों में,
जातक असंग का जलना अमित दुखों में।
हम दोनों जब मर कर वापस जायेंगे,
ये सभी दृश्य फिर से सम्मुख आयेंगे।

‘‘जग की आँखों से अपना भेद छिपाकर,
नर वृथा तृप्त होता मन को समझाकर-
अब रहा न कोई विवर शेष जीवन में,
हम भली-भाँति रक्षित हैं पटावरण में !

‘‘पर, हँसते कहीं अदृश्य जगत् के स्वामी,
देखते सभी कुछ तब भी अन्तर्यामी।
सबको सहेज कर नियति कहीं धरती है,
सब-कुछ अदृश्य पट पर अंकित करती है।

‘‘यदि इस पट पर का चित्र नहीं उज्जवल हो,
कालिमा लगी हो, उसमें कोई मल हो,
तो रह जाता क्या मूल्य हमारी जय का,
जग में संचित कलुषित समृद्धि-समुदय का ?

‘‘पर, हाय, न तुममें भाव धर्म के जागे,
तुम देख नहीं पायीं जीवन के आगे।
देखा न दीन, कातर बेटे के मुख को,
देखा केवल अपने क्षण-भंगुर सुख को।

‘‘विधि का पहला वरदान मिला जब तुमको,
गोदी में नन्हाँ दान मिला जब तुमको,
क्यो नहीं वीर-माता बन आगें आयीं ?
सबके समक्ष निर्भय होकर चिल्लायीं ?

‘‘ ‘सुन लो, समाज के प्रमुख धर्म-ध्वज-धारी,
सुतवती हो गयी मैं अनब्याही नारी।
अब चाहो तो रहने दो मुझे भवन में
या जातिच्युत कर मुझे भेज दो वन में।

‘‘ ‘पर, मैं न प्राण की इस मणि को छोडूँगी,
मातृत्व-धर्म से मुख न कभी मोडूँगी।
यह बड़े दिव्य उन्मुक्त प्रेम का फल है,
जैसा भी हो, बेटा माँ का सम्बल है।’

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

1 mins
WordPress Center Ankara Escort: Beypazarı Escort, Pursaklar Escort, Etimesgut Escort İstanbul Escort: Esenyurt Escort, Bahçelievler Escort, Maltepe Escort Bursa Escort: Gürsu Escort, Keles Escort, İznik Escort What are the best budget smartphones available in 2025? Reason Why Everyone Love Travel Doubts About Lifestyle You Should Clarify UberPanel – Sliding Panel Plugin for WordPress WooCommerce Autoresponder WordPress User Feedback Real Estate Portal for WordPress WPHobby Addons for Elementor Gravity Forms Discord Integration PlayLab – On Demand Movie Streaming Platform WooCommerce Sale Badge Bitcoin, Ethereum, ERC20 crypto wallets with exchange ABBUA Admin WordPress