प्रत्यक्षा के उपन्यास ‘शीशाघर’ का एक रोचक अंश

समकालीन लेखकों में प्रत्यक्षा का स्वर सबसे विशिष्ट है। अपनी भाषा, शैली और ऐस्थेटिक सबमें अलहदा। अभी हाल में ही…

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