मौलिकता, प्रासंगिकता और इतिहास कसौटी पर ‘मतलब हिन्दू’

आज पढ़िए अम्बर पाण्डेय के उपन्यास ‘मतलब हिन्दू’ पर यह टिप्पणी। लिखा है डॉ कुमारी रोहिणी ने। वाणी प्रकाशन से…

अंबर पांडेय की कहानी ‘प्रेत सरित्सागर’

अंबर पांडेय की ‘प्रेत सरित्सागर‘ कई स्तरों पर चलने वाली कहानी है। बिलावल, 42 वर्षीय अकेला युवक, जिसके जीवन में ‘स्त्री’…

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