Posted in समीक्षा ज़ालिम को जो न रोके वो शामिल है ज़ुल्म में Estimated read time 1 min read Posted on May 20, 2026May 21, 2026 by prabhat ‘एक और द्रोणाचार्य’ (1977) शंकर शेष के इस नाटक की अंजलि नैलवाल ने बेहतरीन समीक्षा लिखी है। वे कुमाऊँ विश्वविद्यालय,…