देर आयद दुरुस्त आयद: सुरेन्द्र मोहन पाठक

अगला साल सुरेन्द्र मोहन पाठक के लेखन का साठवां साल है. साथ साल पहले उनकी एक कहानी ‘माया’ पत्रिका में प्रकाशित हुई थी. लेकिन अपने लेखकीय जीवन के साठवें साल में भी उनके पास नई-नई योजनायें हैं, अपने पाठकों के लिए नए नए प्लाट हैं. वे आज भी वैसे ही ऊर्जा से भरपूर हैं. अभी हाल में ही राजकमल प्रकाशन ने यह घोषणा की कि पाठक जी की आत्मकथा का दूसरा खंड वहां से प्रकाशित होने वाला है. इस मौके पर उनका वक्तव्य- मॉडरेटर

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मेरी आत्मकथा तीन खण्डों में है, अगस्त 2017 में जिन का समापन मैंने एक साथ किया था, फिर भी किन्हीं अपरिहार्य कारणों से कोई डेढ़ साल के वक्फे में, केवल एक खंड – ‘न बैरी न कोई बेगाना’ – ही प्रकाशित हो पाया था. सवा साल के असाधारण विलम्ब के साथ दूसरा खंड – ‘हम नहीं चंगे बुरा न कोय’ – अब अप्रैल 2019 में राजकमल से प्रकाशित होगा. ये मेरे लिए संतोष का विषय है कि दूसरे खंड ने आखिर . . . आखिर राजकमल प्रकाशन में अपना मुनासिब मुकाम पाया. दूसरा खंड अन्यत्र प्रकाशित होता तो ये महज खानापूरी होता जब कि उसका राजकमल से प्रकाशन मेरे लिए एक अतिविशिष्ट आयोजन सिद्ध होने वाला है. ये मेरे लेखन जीवन की एक बड़ी घटना है और मेरे लिए गर्व का विषय है कि मेरे जैसा कारोबारी लेखक अपनी आत्मकथा के माध्यम से अब आखिर राजकमल से जुड़ने जा रहा है. सर्वश्रेष्ठ लेखन के प्रकाशन की राजकमल की सत्तर साल से स्थापित गौरवशाली परम्परा है जिस का सुख अब आप का खादिम भी पायेगा.

[] सुरेन्द्र मोहन पाठक

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