सेतु प्रकाशन वार्षिकोत्सव

6 दिसम्बर, 2024 को नयी दिल्ली के ‘इंडिया इंटरनेशनल सेंटर’ में, लेखक-विचारक पराग मांदले की नयी पुस्तक ‘गांधी के बहाने’ का लोकार्पण हुआ। अवसर था सेतु प्रकाशन के वार्षिकोत्सव का।

ज्ञात हो कि ‘सेतु पाण्डुलिपि पुरस्कार योजना (2024)’ के लिए आयी सौ से भी अधिक पाण्डुलिपियों में से पराग मांदले की पाण्डुलिपि ‘गांधी के बहाने’ को पुरस्कार के लिए चुना गया।

सेतु प्रकाशन के इस वार्षिकोत्सव समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार अशोक वाजपेयी, वरिष्ठ साहित्यकार ममता कालिया, वरिष्ठ पत्रकार – लेखक मधुकर उपाध्याय, पत्रकार अशोक कुमार और अध्यापक – अध्येता सौरभ वाजपेयी समेत काफी तादाद में साहित्य प्रेमियों, शोधकर्ताओं और प्राध्यापकों ने शिरकत की। कार्यक्रम का संचालन स्मिता सिन्हा ने किया।

लेखक पराग मांदले का अभिनंदन करते हुए अमिताभ राय ने कहा कि सेतु प्रकाशन ने अपनी अद्वितीय कार्यक्षमता और ट्रेड परफेक्शन के माध्यम से साहित्य और प्रकाशन क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है।उन्होंने बताया कि सेतु प्रकाशन अपने पाठकों तक उच्च गुणवत्ता की सामग्री पहुंचाने में सफल रहा है, जिससे उसकी बाज़ार में पकड़ और लोकप्रियता में निरंतर वृद्धि हो रही है।

इसके साथ ही, सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए, सेतु प्रकाशन ने “बालिका शिक्षा निधि योजना” के तहत दो बालिकाओं को 7-7 हज़ार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की।

कार्यक्रम की शुरुआत पुरस्कृत पुस्तक ‘गांधी के बहाने’ के लोकार्पण से हुई। पराग मांदले को ‘स्मृति चिह्न’ और ‘मानपत्र’ देकर सम्मानित किया।
लोकार्पण के बाद पुरस्कृत पुस्तक पर परिचर्चा की शुरुआत करते हुए अशोक वाजपेयी ने गांधी से दूर होते समाज की विडंबना पर चिंता जताई , जहां गांधी पर लांछन लगाना आम हो गया है। उन्होंने बताया कि गांधी से वे डरते हैं जिनके लिए राष्ट्र केवल जमीन है, धर्म सत्ता का माध्यम है, राजनीति भ्रष्टाचार की शिकार है, और जातिगत पहचान सर्वोपरि है।गांधी ने प्रार्थना सभा जैसी परंपरा स्थापित की, जिसमें सभी धर्मों की प्रार्थनाएं शामिल थीं, और उनके निजी व सामाजिक आचरण में कोई द्वैत नहीं था। गांधी का जीवन नैतिकता और समग्रता का प्रतीक था, जो आज भी प्रासंगिक है।

सौरभ वाजपेयी ने जेएनयू में गांधीवादी होने के अनुभव साझा करते हुए बताया कि गांधी से वामपंथ और दक्षिणपंथी दोनों ही विचारधाराओं के लोग परहेज करते रहे हैं। गांधी के विचारों का प्रचार करते हुए उन्होंने अंध समर्थन से बचने और संवाद की ओर बढ़ने पर बल दिया। गांधीवाद आज भी विभाजन के समय में सहिष्णुता और तर्कशीलता की राह दिखाता है।

अशोक कुमार के अनुसार, गांधी की हत्या के 76 साल बाद भी उन पर प्रतीकात्मक “गोली दागने” का जुनून जारी है। गांधी-अंबेडकर मतभेदों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना और गांधी को हिंदू राष्ट्रवादी घोषित करना उनके विचारों को विकृत करने के प्रयास हैं। गांधी की अहिंसा केवल राजनीति नहीं, बल्कि एक नैतिक जीवन दर्शन है। उन्हें समझने के लिए बच्चों जैसी सरलता और निष्कपटता आवश्यक है, ताकि उनके विचारों की गहराई और प्रासंगिकता को सही रूप में आत्मसात किया जा सके।

मधुकर उपाध्याय के अनुसार, गांधी की आलोचनाओं का जवाब उनकी किताबों में नहीं, बल्कि उनके जीवन में है। वे अपनी आलोचना का स्वयं सक्षम तरीके से उत्तर देते हैं। गांधी प्रासंगिक नहीं, बल्कि अनिवार्य हैं। वे किसी को डराते नहीं, फिर भी उनके विचारों से लोग डरते हैं, क्योंकि वे सत्य, अहिंसा और नैतिकता की वह कसौटी प्रस्तुत करते हैं, जो अन्याय और असत्य को चुनौती देती है।

ममता कालिया के अनुसार, ‘गांधी के बहाने’ पुस्तक का महत्व इस तथ्य में निहित है कि यह रोज़-रोज़ गांधी को खंडित करने की कोशिशों और उनके नाम पर फैलाए जा रहे असत्य व हिंसा का खंडन करती है। पुस्तक बताती है कि गांधी धार्मिक होकर भी सांप्रदायिक नहीं थे और उनके जीवनकाल में ही उनके विरोध की शुरुआत हो गई थी। यह किताब गांधी पर स्त्री-विरोधी होने के आरोपों को भी खारिज करती है, उनके विचारों और व्यक्तित्व को नई दृष्टि से समझने का अवसर देती है।

तृतीय सेतु पाण्डुलिपि पुरस्कार से सम्मानित रचनाकार पराग मांदले ने अपने लेखकीय वक्तव्य में कहा कि गांधी का खंडन या समर्थन अप्रासंगिक है, क्योंकि अधिकतर लोग उनके विचारों से प्रेरणा लेते हैं। गांधी केवल अतीत का विषय नहीं, बल्कि शोषण-मुक्त, अहिंसा-आधारित और पर्यावरण-संवेदनशील दुनिया की राह दिखाने वाले मार्गदर्शक हैं। उनकी विचारधारा एक न्यायपूर्ण और टिकाऊ भविष्य का आधार प्रदान करती है। आज जरूरत इस बात की है कि हम वर्तमान परिस्थितियों में गांधी विचारों को नए सिरे से परिभाषित करें।

कार्यक्रम का समापन अमिताभ राय ने सेतु प्रकाशन की स्थापना से अब तक, पिछले पाँच साल की प्रगति तथा ‘सेतु’ के उद्देश्यों व प्रतिबद्धताओं के बारे में बताते
हुए सभी वक्ताओं और श्रोताओं के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

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