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  • अगत्य की उदासी

     

    प्रियंका ओम युवा लेखिकाओं में जाना पहचाना नाम है। इस बार उन्होंने एक बाल कहानी लिखी है। एकल परिवार के बच्चे के अकेलेपन को लेकर। पढ़िएगा- मॉडरेटर

    =================================

    लंच ब्रेक में जब वो दोनो क्लास रूम में अकेले थे तब लड़की ने नाम पूछ कर बात शुरू की।
    तुम्हारा नाम क्या है ?
    अगत्य।
    आदित्य?
    नही, अगत्य!
    अच्छा,  अगस्त्य!
    एक तो क्लास रूम में लंच करने के दंड से अगत्य पहले ही दुखी था ऊपर से लड़की को उसका नाम समझने में जो प्रॉब्लम हो रही थी उससे वह और चिढ़ गया था इसलिए चीख़ कर बोला A G A T Y A ! अगत्य!

    तुम चिल्ला रहे हो, तुम गंदे लड़के हो और इसलिये तुम्हें क्लास रूम में लंच खाने का दंड मिला है। लड़की बुरा मान गई थी!

    तुम तो मुझसे भी ज़्यादा गन्दी हो इसलिए तुम्हें रोज़ क्लास रूम में टिफिन खाने की सजा मिलती है। अगत्य ने ग़ुस्से से कहा!
    नहीं मैं सुन्दर लड़की हूँ, मेरी मम्मी ने धूप में जाने से मना किया है, मेरा चेहरा काला पड़ जायेगा!
    लड़के को उसके काले गोरे होने से कोई फर्क नहीं पड़ता, वह अपनी सफाई में कहता है मेरी मम्मा ने भी टीचर से कम्प्लेन किया है, मैं टिफिन खाने के समय खेलता हूँ; खाना पूरा नहीं खाता।

    अब दोनों के बीच एक ख़ामोशी पसर गई थी, स्याह रात के घने अंधेरे जैसी ख़ामोशी। लड़की चुपचाप पास्ता खा रही है और अगत्य ब्रेड नतेल्ला। उस शान्त झील जैसी ख़ामोशी में उनके मुँह चलाने की आवाज़ मछलियों के आपसी संवाद लग रहे थे, कोमल और दिलकश जिसे समझने के लिये मत्स्य भाषाविद होना नितांत आवश्यक है।

    अभी कुछ ही दिन हुए है अगत्य के मम्मी पापा भारत से अफ़्रीका के दार सिटी तंज़ानिया शिफ़्ट हुए है, अगत्य का आज स्कूल में दूसरा हफ़्ता है।  यह स्कूल घर के बहुत पास है मॉम को दूर के स्कूल पसंद नहीं है, वो कहती है बच्चा स्कूल में कम, स्कूल बस में ज़्यादा होता है!

    अगत्य को भी यह स्कूल बहुत पसंद आया है।  सभी टीचर्ज़ और क्लास मेड्ज़ बहुत अच्छी है, स्कूल में खिलौने भी बहुत है।

    उसकी क्लास में पढ़ने वाले ज़्यादातर बच्चों के छोटे छोटे काले घुंघराले सख्त बाल है, जिनके लम्बे है उनके सुनहरे है बस यह एक लड़की है जिसके बाल काले भी हैं और लम्बे भी।  यह लड़की भी अगत्य की तरह भारतीय है यह उसने शुरू में ही नोटिस कर लिया था!

    अगत्य बालों और त्वचा के रंग के इस फ़र्क़ को नहीं समझता, उसे तो बस खेलने की धुन रहती है।  जो उसके साथ खेलता है वह उसका दोस्त है और इतने कम समय में  ही उसके बहुत से दोस्त बन गये हैं बस इस लड़की से कोई बात नही हुई है।  यह लड़की सिर्फ़ भीतरी हिस्से में खेले जाने वाला खेल खेलती है लेकिन अगत्य को तो फिजिकल एक्टिविटी वाले खेल पसंद है।  वह सबके साथ सॉकर  खेलता है हलाकि उसे क्रिकेट खेलना बहुत भाता है और वह धोनी की तरह क्रिकेटर बनना चाहता है लेकिन यहाँ कोई भी क्रिकेट नही खेलता।  पापा ने बताया जैसे भारत में सभी क्रिकेट खेलते हैं वैसे यहाँ सभी सॉकर खेलते है, यहाँ रहते हुए उसे क्रिकेट भूल जाना चाहिए!

    इस भारतीय लड़की की दिलचस्पी ना तो क्रिकेट में है न सॉकर से कोई लगाव है, बस कभी कभी ही बाहर निकल कर खेलती है, खेलती क्या है बस झूला झूलती रहती है जैसे मम्मी की कहानियों वाली कोई परी हो।  बाक़ी के दिन सिर्फ़ लेगो या कोई बोर्ड गेम खेलती है!

    अगत्य बहुत मिलनसार है बहुत जल्दी सबसे घुल मिल गया है और यहाँ के हिसाब से ख़ुद को ढाल लिया है।  इस बात के लिये मम्मी पापा को उस पर बहुत गर्व होता है! उनकी हर बात मानता है कभी बेकार की ज़िद नही करता है लेकिन वो लोग जबसे यहाँ आये हैं अगत्य बदलने लगा है।  हर बात पर ग़ुस्सा करता है बात बात पर रोने लगता है, लंच तो कभी भी ख़तम नहीं करता है।  देखने में कमज़ोर लगने लगा है, चिड़ चिड़ा हो गया है।  मम्मी बहुत दुखी रहती है इसलिये स्कूल में शिकायत कर दिया।

    ऐसा नहीं है कि उसे भूख नहीं लगती लेकिन वह बहुत धीरे खाता है।  दादी कहती थी खाना धीरे धीरे चबा कर खाना चाहिये और इतने में लंच टाइम निकल जाता है। स्पोर्ट्स ब्रेक इतना छोटा होता है कि उतना खेलने से उसका मन नही भरता इसलिए वह लंच टाइम में भी खेलता है!

    रोज़ स्कूल जाते वक़्त मम्मी का यह रटा रटाया जुमला “खाओगे नहीं तो कमज़ोर हो जाओगे, कमज़ोर हो जाओगे तो खेलोगे कैसे ?” अब अगत्य को भी सुग्गे की तरह याद हो आया है! पापा इस बात पर कहते हैं कितना भी रटवा लो आज भी नहीं खायेगा पता नही यहाँ आकर इसे क्या हो गया है?।

    अगत्य मम्मी को निराश  नहीं करना चाहता और पापा को ग़लत भी साबित नहीं कर पाता है, आख़िर वह करे भी तो क्या करे ? उसे खेलना बहुत अच्छा लगता है।  घर पर उसके साथ खेलने वाला कोई नही है।  या तो सारा दिन टी वी पर कार्टून देखता है या पापा की पुरानी मोबाइल पर गेम खेलता है।  मम्मी इसके लिये भी डाँटती है, सारा दिन टी वी देखते रहते हो, तुम भी नोविता के जैसे बुद्धू बन जाना।

    मम्मी उसकी पसंद के बहुत सारे खिलौने खरीद लाती है एक दो दिन तो वह उन खिलौनों से खूब खेलता है लेकिन फिर अकेले खेलते खेलते ऊब जाता है।  पिछली बार पापा जर्मनी से उसके लिए एक ऐसी खिलौना कार लेकर आये थे जो चलते-चलते रोबोट में तब्दील हो जाती थी।  कार को रोबोट में बदलते हुए देखना उसे बहुत अच्छा लगता था, वह बहुत खुश होता था और अपनी ख़ुशी साझा करना चाहता था।  एक दो बार तो मम्मी ने खूब साथ दिया लेकिन बाद में कहने लगी एक ही चीज़ देख देख कर बोर हो गई हूँ! कभी कभी वो साथ में क्रिकेट या फुटबॉल खेलती है लेकिन थोड़ी देर में ही थक जाती है, कहती है मुझमें तुम्हारे जितनी एनर्जी नही है जाओ छोटा भीम ही देख लो इसलिए वह सारा दिन कार्टून देखता है!

    उसकी क्लास में पढने वाला आश्ले सुबह से शाम तक स्कूल में रहता है, उसकी मम्मी भी नौकरी पर जाती है।  वह सोचता है काश मेरी मम्मी भी काम करती जैसे भारत में करती थी, तब वह भी डे केयर में रह सकता था।  यहाँ घर में उसकी देख भाल करने के लिये दादी और दादू तो हैं नही।  डे केयर में कितना मज़ा है, सारा दिन आश्ले और अन्य दोस्तों के साथ खेलना फिर शाम ढले घर जाना!

    ऐसा नहीं है की उसे घर जाना अच्छा नहीं लगता ! रोज़ स्कूल के गेट पर मॉम को देख कर ऐसा लगता है जैसे आज बहुत दिन बाद देखा हो “मॉम”, कहता हुआ वह दौड़ कर उनसे लिपट जाता है, मम्मी भी उसे ऐसे गले लगाती है जैसे कई सालों से नहीं देखा हो” लेकिन घर पहुँचते ही फिर से वही सब शुरू हो जाता है “टी.वी  कार्टून और मॉम की डाँट ” ! वह इस सबसे तंग आ चुका है, वह हॉस्टल जाना चाहता है।  उसने तारे ज़मीन पे सिनेमा में हॉस्टल देखा है, फिल्म में ईशान हमेशा रोता रहता है वह होता तो कभी नहीं रोता बल्कि बहुत खुश रहता लेकिन मम्मी पापा हॉस्टल का नाम भी नहीं सुनना चाहते हैं।  फिल्म देखते हुए उसने कहा हॉस्टल कितना अच्छा है, वहां कितने फ्रेंड्स है तो मम्मी पापा ने उसे डांट दिया!

    सोसाययटी में रहने वाले दूसरे सभी बच्चे शाम से पहले  खेल परिसर में नही आते, उसकी तरह अकेला कोई नहीं है सबके भाई बहन हैं।   उसके साथ खेलने वाला कोई नही सोचता हुआ अगत्य उदास हो जाता है ।

    उदासी में कुछ भी अच्छा नही लगता है।  ऊपर से टिफ़िन में मूँग दाल का चीला।  उसने बुरा सा मुँह बनाया।  वैक !

    दूसरे टेबल पर बैठी लड़की पर नज़र पड़ते ही उठकर उसकी टेबल पर चला गया ! अगत्य को दो चीज़ें बहुत पसंद है पहला तो खेलना दूसरा बोलना।   पापा कई बार कहते है पहला स्वभाव पापा से मिलता है दूसरा मम्मा से।
    वैसे भी लड़के कहाँ बातों की गाँठ बाँधते है।  सो जेनेटिक और जेंडरटिक प्रभाव के अतिरेक में आकर उसने लड़की से पूछ लिया
    ” तुम्हारा नाम क्या है ?”
    लड़की तो जैसे उसके पूछने का इंतज़ार कर रही थी!
    फलक,  फलक ज़ुल्फ़ीकार! उसने जल्दी में कहा!
    फलक! अगत्य ने सुनिश्चित किया !
    हाँ फ़लक!
    फलक ने बात को आगे बढ़ाते हुए पूछा “तुमने अपना लंच देखकर वैक क्यूँ किया ?”
    दोनों में दोस्ती हो रही थी !
    क्यूँकि मूँग दाल का चीला मुझे बिलकुल पसंद नहीं लेकिन मॉम तो मुझे यही खिलाना चाहती है!
    क्यूँ ? फलक को बहुत आश्चर्य हो रहा था ?
    मॉम कहती है मूँग दाल में बहुत प्रोटीन होता है अगर मैं चीला खाऊँगा तो लड़ाई  में sumo को भी हरा दूँगा !
    फलक की बड़ी बड़ी आँखें आश्चर्य से और बड़ी हो गई, लेकिन मुझे तो पास्ता बेहद पसंद है  कहते हुए उसने फ़ॉर्क चुभे हुए पास्ता को अपने दाँतों से खींच लिया !
    लेकिन मेरी मॉम कहती है पास्ता जंक फ़ूड है! अगत्य ने मम्मा से प्राप्त अपना सामान्य ज्ञान दर्शाया!
    मेरी मम्मा तो बेस्ट है! फलक चिढ़ गई!
    मेरी मॉम तो सुपर बेस्ट है , अगत्य ने बड़े घमंड से कहा!
    और मेरी मॉम सुपर सुपर सुपर बेस्ट!
    और मेरी मॉम वर्ल्ड की बेस्ट सुपर मॉम !
    फलक ने ऊँ कहते हुए जीभ दिखा दिया! शायद उसने हार मान ली थी!
    लड़कियाँ चिढ़ती बहुत हैं और लड़कों को उन्हें चिढ़ाने में मज़ा आता है!

    सजा वाले दिन अगत्य लंच तो पूरा ख़तम करता है लेकिन मम्मा को हग नही करता है लेकिन आज वो बहुत ख़ुश था उसने मम्मा को हग करते हुए फ़लक के चिढ़ने के बारे में बताया!

    अगत्य का मन लगने लगा है लंच भी फ़िनिश होने लगा है! अब सब ठीक हो जायेगा, मम्मा भी मन ही मन ख़ुश हुई!

    उस दिन फ़्राइडे था! ग़र्मी का मौसम अपने अंतिम दिनों में था! रोज़ की तुलना में मौसम बहुत अच्छा था! फ़लक और अगत्य साथ में झूला झूल रहे थे! अगत्य ने अचानक ही कहा “मुझे छुट्टियाँ ज़रा भी पसंद नहीं”! फलक ने बिना समय गँवाये ही कहा “लेकिन मुझे तो बहुत पसंद है”!
    हाँ तुम्हें तो ना खेलने में मन लगता है ना पढ़ने में, अगत्य ने उसे ताना मारा था!
    छुट्टियों पर मैं अपने भाई के साथ खेलती हूँ!
    भाई ? अगत्य को आश्चर्य हुआ था!
    हाँ, मेरा छोटा भाई!
    कज़िन ? अगत्य यकीन नहीं कर पा रहा था!
    नहीं, वह मेरा सगा भाई है!
    सगा भाई क्या होता है ? अगत्य समझा नहीं!
    वो मेरी मॉम के पेट से आया है और हमारे साथ हमारे घर में ही रहता है!
    अच्छा। कहकर अगत्य चुप हो गया था!
    छुट्टी पर मैं घर में अपने भाई के साथ बहुत खेलती हूँ, वह सप्ताहांत का इंतज़ार करता है! फ़लक ने बात आगे बढ़ाई!
    क्या खेलती हो तुम उसके साथ ? अगत्य बहुत उत्सुक था!
    बॉल बॉल खेलती हूँ, उसको कवितायें गा कर सुनाती हूँ और कभी कभी उसके डाइपर भी बदलती हूँ !

    ये सब करने में तुम्हें मज़ा आता है अगत्य ने अत्यधिक उत्सुकता से पूछा!
    बहुत, फ़लक ने आत्ममुग्धता में कहा, फिर थोडा रुक कर कहा अब जल्दी ही वह भी स्कूल आना शुरू करेगा!

    आज स्कूल से आकर अगत्य चुप चुप था, कुछ बोल नही रहा था। खोया खोया सा था वह! उसके जहन में फलक की बातें उधम मचा रही थी!

    “क्या हुआ बेटा?” मम्मी घबरा गई थी।
    ‘मम्मा मेरा कोई अपना भाई क्यूँ नही है?’ कुछ सोचते हुए उसने पूछा था !
    क्यूँकि .. मम्मा बोलना शुरू करते ही रुक गई थी, तुम नही समझोगे, अभी बहुत छोटे हो !
    नही मुझे बताइये, कल तो आप कह रही थी मैं बड़ा हो गया हूँ अगत्य ज़िद्द पर अड़ा था !
    क्यूँकि महंगाई बहुत बढ़ गई है और तुम बहुत फ़रमाइश करते हो!
    अब फ़रमाइश नही करूँगा, अब ले आइये मेरे लिए भाई; मुझे उसके साथ खेलना है जैसे फ़लक खेलती है अपने अपने भाई के साथ !
    जाओ डोरेमोन देखो कहते हुए मम्मी की आवाज़ भर्रा गई थी!
    नहीं मुझे तो भाई चाहिए!

    भाई बाज़ार में नहीं मिलते, मम्मी की आवाज़ चिढ़ी हुई थी!

    मैं जानता हूँ मॉम कि टम्मी से आते हैं! यह सुनते ही मम्मी ने उसे चटाक से एक थप्पड़ लगाया – बहुत बोलने लगे हो! वह रोने लगा! फिर रोते रोते कब सो गया था उसे ध्यान नहीं लेकिन नींद खुली तो किसी के बोलने की आवाज़ आ रही थी – “कम का अर्थ एक नहीं होता, कम से कम दो तो होने ही चाहिए, बच्चों के व्यक्तित्व के विकास के लिए यह बेहद जरुरी है।  मेरे दोनों बच्चे कब university चले गए मुझे पता भी नहीं चला, और दोनों एक दुसरे के सबसे अच्छे दोस्त” यह नाइन्थ फ्लोर वाली इंडियन  आंटी की आवाज़ थी, वह कभी कभी  मम्मी से मिलने आती है शायद वह भी अगत्य की तरह अकेली हैं!

    वह सोकर उठता है तो सीधा मम्मी के पास जाता है लेकिन आज वह गुस्सा है, मम्मी ने उसे थप्पड़ मारा है, वह मम्मी के पास नहीं जायेगा !

    डॉक्टर ने दूसरे बच्चे के लिये मना किया है, मेरी जान जा सकती है, अगत्य के समय भी बहुत कॉम्प्लिकेशंज़ थे ! डॉक्टर ने कहा था किसी एक को बचाया जा सकता है, दोनो को बड़ी ही मुश्किलों से बचाया गया था !  डॉक्टर ने साफ़ साफ़ कहा था दूसरी बार वो कुछ नही कर पायेंगे।  यह मम्मी की आवाज़ थी!

    अगत्य अक्सर बीमार होता रहता है, उसकी इम्युनिटी बहुत कमज़ोर है! डॉक्टर के पास आता जाता रहता है।  वह मम्मी की पूरी बात तो नहीं लेकिन इतना ज़रूर समझ गया कि भाई को लाने में मम्मी की जान जा सकती है, वह डर के मारे काँप गया।  दौड़कर मम्मी से जा लिपट गया!

    मम्मी उसके सर पर हाथ फेर कर उसे चूमते हुए अपनी ही रौ में बोले जा रही थी कितना तो अरमान था दो बच्चों का, एक बेटी और एक बेटा! तब जाकर परिवार पूरा होता है! जो बड़ा होता है वह छोटे का धयान रखता है लेकिन क़िस्मत की लकीरें इतनी उलझी हुई होती है कि हम चाह कर भी रास्ता नही निकाल पाते हैं!

    अगत्य मम्मी से चिपका हुआ ध्यान से सुन रहा था मैं अगत्य का अकेलापन बख़ूबी समझती हूँ, ख़ुद भी बड़े परिवार से हूँ और हम बहुत से भाई बहन हैं! उम्र में कम अंतर होने के कारण हम सभी भाई बहन आपस में दोस्त थे! साथ स्कूल जाते साथ आते! साथ साथ लड़ते झगड़ते खेलते बड़े हुए थे! किसी फ़िल्म की चर्चा हो या किसी किताब पर सारे भाई बहन अपनी अपनी राय देते थे और उसपर घंटों डिस्कशन करते थे! हमें कभी बाहरी दोस्त की ज़रूरत महसूस नही हुई!

    मैं समझती हूँ बच्चों के व्यक्तित्व के विकास के लिये भाई या बहन का होना कितना ज़रूरी है ! बच्चों में रिश्ते को समझने के लिये और रिश्तों का अस्तित्व बचाये रखने के लिये कम से कम दो बच्चा बेहद ज़रूरी है! नही तो आने वाले समय में चाचा या बुआ जैसे रिश्ते लुप्त हो जायेंगे!

    लेकिन मैं चाह कर भी अगत्य को भाई या बहन नही दे सकती! एक बार तो एक बच्चा अडॉप्ट करने की सोचा! दुनिया में ऐसे बहुत से बच्चे हैं जिन्हें माँ बाप के प्यार की ज़रूरत है! लेकिन परिवार के सभी सदस्य इस बात से सहमत नही हुए! उनका मानना है अपना ख़ून अपना ही होता है और बात आइ गई हो गई!

    लेकिन आज मुश्किल हो रहा है अगत्य के सवालों का जवाब देना और उससे भी ज़्यादा मुश्किल हो रहा है उसका अकेलापन दूर करना।

    अब तो ईस्टर की लम्बी छुट्टियाँ होने वाली होगी, हैं न अगत्य? आंटी ने उससे पूछा!

    हाँ, डायरी में शायद यही लिखा है आज!

    international स्कूल में पढ़ाई कम और छुट्टियाँ ज़्यादा होती है! तीन महीने में तीस दिन स्कूल बंद ही रहा है, आज ये तो कल वो अब ईस्टर की छुट्टी में घर में सारा दिन डोरेमोन और नोविता। अगत्य से ज़्यादा उसकी मम्मा उदास थी!

    अगत्य ने लंच को छुआ भी नहीं ! नई इलेक्ट्रॉनिक बाइक आई है स्कूल में! जब बाक़ी के बच्चे लंच कर रहे थे उस वक़्त अगत्य बाईक के साथ खेल रहा था।

    फ़लक ने याद दिलाया अगत्य लंच फ़िनिश कर लो नही तो कल फिर पनिश्मेंट मिलेगा!

    कल से तो ईस्टर हॉलिडे शुरू है बुद्धू, आज खेल लेने दो कल से तो फिर टेन डेज़ के लिये बोर होता रहूँगा!  दस दिन की छुट्टी के अनाउन्स्मेंट पर सारे बच्चे ख़ुशी के मारे ये ये करने लगे! बस अगत्य दुखी हो गया था!

    तुम सैड क्यूँ हो गये फलक ने पूछा!
    मुझे हॉलिडे बिलकुल पसंद नही है!
    मुझे तो हॉलिडे बहुत अच्छा लगता है!
    तुम्हारी तरह मेरा कोई ओन ब्रदर नही है ! अगत्य अब और अधिक उदास हो गया था !
    आज तो भारत से मेरे दादा जी और दादा आ रहे हैं ! फलक ने ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए कहा !
    वाह क्या किस्मत है तुम्हारी अगत्य ने गहरी उदासी से कहा !
    तुम्हारे दादा दादी नही हैं ?
    हैं, लेकिन वे भारत में हैं !

    अगत्य को याद हो आया इंडिया में कैसे दादू उसके लिये कभी घोड़ा बनते थे और दादी कहानियाँ सुनाती थी! दादू दादी तो उसके साथ लूडो भी खेलते थे और कैरम तो जानबूझकर कर हार जाते थे! अगत्य गेम में उनके साथ चीटिंग भी करता था दादी को तंग भी बहुत करता था! फिर भी दादी उसके स्कूल से आने के टाइम पर दरवाज़े के पास ही बैठी रहती थी! कितना रोई थी दादी जब वो यहाँ आ रहा था! अब हफ़्ते में एक बार स्काइप पर बात होती है दादी कहती है अगत्य के बिना उनका मन नही लगता। मन तो अगत्य का भी नही लगता लेकिन वो मम्मी पापा के बिना नही रह सकता!

    मॉम आज फ़लक के दादा दादी आ रहे हैं!

    अच्छा!
    मॉम क्या मेरे दादू और दादी यहाँ नही आ सकते ?

    यह सुनकर मॉम ने उसे ऐसे देखा जैसे उन्हें सबसे टफ़ पज़ल का हल मिल गया है जो उनकी आँखों के सामने तो था लेकिन सूझ नही रहा था!

     

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