स्त्रियां किसी भी कीमत पर प्रेम नहीं खोना चाहतीं

आज प्रीति चौधरी की कविताएँ. प्रीति की कविताएँ विमर्श करती बौद्धिक कविताएँ हैं. कई सन्दर्भों को एक अलग ढंग से देखते हुए, स्त्री-विमर्श को एक अलग ऐंगल से देखते हुए. पढ़िए उनकी चार कविताएँ- जानकी पुल.

१.
मेनोपॉज की दहलीज पर
मेनोपॉज की दहलीज पर खड़ी
उस प्रौढ़ औरत और
जीवन के पाँचवे दशक में प्रवेश करती युवा स्त्री
दोनों ने एक साथ एक समय पर एक ही बात सुनी
दोनों ने सुना
नही रहे उनके अमृत कलश अब उन्नत
दोनों ही स्त्रियों ने चाहा वे दौड़ पड़ें
पृथ्वी का चक्कर काट मिल आयें
दुनिया की उन सारी स्त्रियों से
जिनके वक्ष ढल चुके थे या
ढलान की कगार पे थे
वे सबसे पूछना चाहती थी
क्या वक्षों का अवसान होता है इतना दुखद
कि स्त्रियां खो बैठें अपना प्रेम
उन स्त्रियों ने चाहा
तोड़ डाले वे उन होर्डिंगों को जो
छह माह तक दुग्धपान कराने की संस्तुति करते हैं
फाड़ डाले उन अखबारों को जो
मातृदुग्ध की प्रतिरोधी क्षमता बखानते हैं
वक्ष ढलने की वजह चाहे उम्र हो या स्तन पान कराना
ढले वक्षों वाली स्त्रियां शोक में थीं
 २.
इस शोक गीत में शामिल स्त्रियां
सिर्फ देह थीं
और देह में अब उन्नत वक्ष नहीं थे
कई स्त्रियों ने खोया अपने पुरूषों को
क्योंकि वे ढल चुकी थीं
शहर में ही ढेर सारे पुरूष थे
शहर में ही सारी कुंवारी लड़कियाँ थीं
ये प्रौढ़ औरतें हार रही थीं कुंवारी लड़कियों से
शहर में अख़बार था, अख़बार में विज्ञापन था
कई तरह की क्रीमों के साथ सिलिकॉन इम्पलान्ट के विकल्प थे
स्त्रियां किसी भी कीमत पर प्रेम नहीं खोना चाहतीं
स्त्रियों को पूछना पड़ेगा
धूमिल और शमशेर से कि
वे सिर्फ देह हैं बकौल धूमिल या फिर
उठाओ निज वक्ष और कस और उभर
कहने वाले शमशेर की प्रेमिका
स्त्रियों पूछो अनामिका, कात्यायनी और सविता सिंह से
वक्षों से इतर प्रेमी किस नगर में बसते हैं?
२.
शहर की बदलती फि़जां
दलालों ने सूंघ ली
कुछ ने बदले चेहरे
कुछ ने चढ़ाये नये रंग
कुछ ने बहुत मशक्कत से
नये निज़ाम के
पसंदीदा शब्दों की बनायी सूची
पुराने क़ाफिलों की याद में
कुछ सड़कें उदास हो गयीं
कुछ जनपद तैयार हो गये
नये नामों के लिए
कई कबूतरों ने तलाशे नये आशियाने
सारे गिरगिट अपनी रीढ़ की हड्डी का
पिण्डदान करने
सामूहिक अवकाश ले गया चले गये।
3
भूगोल की किताब
लिखा है किताब में भूगोल की
हज़ारों साल पहले
हिमालय की जगह
था कोई महासागर टेथिस
दरअसल
हिमालय, हिमालय की ऊँचाई पाने से पहले
छिपा था टेथिस की गहराई में
गोंडवाना और तिब्बत के भूखण्डों के बीच
टकराता, घायल, लहूलुहान सदियों तक
संजोता रहा चोटों को
जब्त किया कितना कि
गहरा गया इतना
ऊँचा उठा तो हो गया हिमालय
अब टेथिस थी या था
इसका फैसला करता रहे व्याकरण
मेरे लिए यदि
टेथिस थी तो वो रच रही थी
स्त्री विमर्श की पूर्व पीठिका
टेथिस था तो
बन रहा था हाशिए का आख्यान
ख़ैर जो भी हो
महत्वपूर्ण ये है कि
सारी चोटों को एक दिन
हिमालय जितना ऊँचा उठ जाना चाहिए।
4
न्याय एक पासवर्ड है
दीवाने ख़ास की उस भरी सभा में
राजा के सिपहसालार ने घोषणा की
जनता को न्याय मिलना चाहिए   
मुख्य सचिव ने नोट किया
न्याय मिलना चाहिए
समस्त प्रमुख सचिवों ने
हरी स्याही से लिखा
शासन की मंशा है कि
जनता को न्याय मिलना चाहिए
जिलाधिकारियों ने जिलों को कूच किया
रटते हुए कि
जनता को न्याय मिलना चाहिए
अखबारों में भी राजकोष से लाखों के विज्ञापन गये
जनता को न्याय मिलना चाहिए
राजा के मिशन की
दुंदुभी बज गयी चहुँ ओर
बस जनता ही थी
जो इस मुहिम पे यक़ीन न कर सकी
किसी ने घर-घर एक पुर्जी पहुँचा दी
जिस पर पेंसिल से लिखा था
न्याय एक पासवर्ड है
अधिनायकत्व, चोरबाजारी और भड़ुवागिरी को
लोकतांत्रिक अनुष्ठान कर,
शासनादेशों में झूठी इबारत
लिखने की एक खतरनाक साजिश।

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