हिंदी के मठाधीश कविता की विविधता को सेंसर करते रहे, उसकी आवाजों को एकायामी बनाने की जिद करते रहे. लेकिन…
आकांक्षा पारे की कहानी ‘सखि साजन’
समकालीन लेखिकाओं की सीरिज में आज आकांक्षा पारे की कहानी. उनकी कहानियां स्त्री लेखन के क्लीशे से पूरी तरह से…
पतनशील पत्नियों के नोट्स
नीलिमा चौहान ने हाल के वर्षों में स्त्री-अधिकारों, स्त्री शक्ति से जुड़े विषयों को लेकर बहुत मुखर होकर लिखा है…
ऋत्विक घटक का सिनेमा सदा प्रासंगिक रहेगा
40 साल पहले इसी महीने जीनियस फिल्मकार ऋत्विक घटक का देहांत हुआ था. आज उनकी शख्सियत को, उनके सिनेमा को…
इन लव विद ‘आज़ादी मेरा ब्रांड’
व्यक्तिगत मतभेदों, वैचारिक विरोधों का असर अच्छी पुस्तकों पर नहीं पड़ना चाहिए, जानकी पुल ने सदा इस मानक का पालन…
मगर जनता नहीं डरती मियाँ आँखें दिखाने से
युवा शायर त्रिपुरारि कुमार शर्मा की इन दो गज़लों की भूमिका में कुछ नहीं लिखना. ये आज के युवा आक्रोश…
अंकिता आनंद की बाल कविताएं
इस कविता आच्छादित समय में ध्यान आया कि बाल कविताओं की विधा में किसी तरह का नवोन्मेष नहीं दिखाई देता…
‘रिमझिम’ की समीक्षा की समीक्षा
कुछ दिनों पहले जाने-माने चित्रकार और लेखक अखिलेश ने स्कूलों में पढ़ाई जा रही हिंदी को लेकर एक सुदीर्घ और…
हिमालय को लेकर हिमालयी चिंता का दस्तावेज़
बचपन में रामधारी सिंह दिनकर की कविता पढ़ी थी ‘मेरे नगपति मेरे विशाल/ साकार दिव्य गौरव विराट’. हिमालय पर थी.…
अनु सिंह चौधरी की कहानी ‘नीला स्कार्फ’
स्त्री-लेखन की चर्चा में उन लेखिकाओं की चर्चा भी होनी चाहिए जिन्होंने स्त्री-लेखन के दशकों पुराने ‘क्लीशे’ को तोड़ा और…



