अपनी पीढ़ी के जिन कवियों के मैं खुद को निकट पाता रहा हूँ पंकज चतुर्वेदी उनमें सबसे प्रमुख हैं. शोर-शराबे…
बाबुषा की कविताएं
इस साल बाबुषा के कविता संग्रह ‘प्रेम गिलहरी दिल अखरोट’ ने सबका ध्यान खींचा. इस साल की अंतिम कविताएं बाबुषा…
वे भाषा की भूलों को कभी नहीं भूलते थे
पंकज सिंह- पहली बार मदन मोहन झा सर ने उनका नाम लिया था. कहा था कि बहुत बड़े कवि हैं.…
प्रेम बिना हिंदी सूना
कल प्रभात खबर में मेरी एक छोटी-सी टिप्पणी आई थी. पढ़कर बताइयेगा- प्रभात रंजन ======================================================= आज ही एक अखबार के…
जिनको दुनिया की सबसे सुन्दर अभिनेत्री माना गया था
आज गुजरे जमाने की महान अदाकारा नलिनी जयवंत की पुण्यतिथि है. उनके अभिनय, उनके मकाम को बड़े प्यार से याद…
भिखारी ठाकुर की जयंती और स्त्री मन से मेल-मिलाप की बात
आज भिखारी ठाकुर का जन्मदिन है. इस मौके पर उनकी कला, उनके सरकारों को याद करते हुए, अपने अनुभवों को…
अनुवादक का कोई चेहरा नहीं
हिंदी में अनुवाद और अनुवादक की स्थिति पर यह एक छोटा-सा लेख आज ‘प्रभात खबर’ में आया है- प्रभात रंजन …
राबर्ट ब्रेसां का मर्मस्पर्शी सिनेमा
उर्दू के उस्ताद लेखक कृशन चंदर ने एक उपन्यास लिखा था ‘एक गधे की आत्मकथा’. मशहूर फ्रेंच फिल्मकार रॉबर्ट ब्रेसां ने गधे…
स्मिता पारिख की नज्में
हिंदी में नज्में कम लिखी जाती हैं. अहसास की शिद्दत कविताओं में कम दिखाई देती है. कुछ बने-बनाए सांचे हैं,…
स्त्री-लेखन में नयापन नहीं है?
आज ‘प्रभात खबर’ में मेरा एक छोटा-सा लेख आया है. उसका थोड़ा सा बदला हुआ रूप- प्रभात रंजन ================================================================= अभी…



