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जानकी पुल – A Bridge of World Literature

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मन की बात के दौर में तन की बात

February 4, 20151 mins5
जिन्होंने भी पंकज दुबे का उपन्यास ‘लूजर कहीं का’ पढ़ा है वे यह जानते हैं कि उनके…
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    अंतरात्मा सिर्फ बड़े लोगों के पास होती है

    February 3, 20151 mins183
    एक नया व्यंग्य संग्रह आया है राकेश कायस्थ का ‘कोस कोस शब्दकोश’. एक चुटीला व्यंग्य उसी से…
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      रंगीन शीशे से दुनिया को देखना: आर के लक्ष्मण

      February 1, 2015October 24, 20201 mins9
      2015 में ‘दैनिक हिन्दुस्तान’ में महान कार्टूनिस्ट आर. के. लक्ष्मण की आत्मकथा ‘द टनेल ऑफ़ टाइम’ का…
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        शैलजा पाठक की कविताएं

        January 31, 2015July 29, 20201 mins12
        आज शैलजा पाठक की कविताएं. शैलजा पाठक  की कविताओं में विस्थापन की अन्तर्निहित पीड़ा है. छूटे हुए…
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          भोजपुरी फिल्मों का सफरनामा एक किताब में

          January 29, 20151 mins5
          भोजपुरी सिनेमा के ऊपर एक किताब आई है जिसके लेखक है रविराज पटेल. रविराज पटेल से एक…
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            लक्ष्मण बुनियादी तौर पर ‘कॉमन सेंस’ के कार्टूनिस्ट थे

            January 28, 20151 mins8
            आर. के. लक्ष्मण को श्रद्धांजलि देते हुए मेरे प्रिय कार्टूनिस्ट राजेंद्र धोड़पकर ने उनकी कला का बहुत…
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              कामयाबी से गुमनामी तक का सफरनामा

              January 26, 20151 mins6
              सत्तर के दशक के में हिंदी सिनेमा के पहले सुपर स्टार माने जाने वाले राजेश खन्ना का…
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                हर पिछला कदम अगले कदम से खौफ खाता है

                January 24, 20151 mins8
                ‘लप्रेक’ को लेकर हिंदी में जिस तरह की प्रतिक्रियाएं देखने में आ रही हैं उससे मुझे सीतामढ़ी…
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                  क्रांति और भ्रांति के बीच ‘लप्रेक’

                  January 23, 20151 mins5
                  लप्रेक के आने की सुगबुगाहट जब से शुरू हुई है हिंदी में परंपरा-परम्परा की फुसफुसाहट शुरू हो…
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                    प्रेमचंद की परम्परा बचेगी या लप्रेक की परम्परा चलेगी

                    January 22, 20151 mins159
                    ‘लप्रेक’ एक नई कथा परम्परा की शुरुआत है. लेकिन हर नई शुरुआत को अपनी परम्परा के साथ…
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