समकालीन हिंदी कविता पर समसामयिकता का दबाव इतन अधिक हो गया है, विराट का बोझ इतना बढ़ गया है कि…
‘लखनऊ बॉय’ विनोद मेहता का स्मरण
विनोद मेहता का जाना पत्रकारिता के एक मजबूत स्तम्भ का ढह जाना है. उस स्तम्भ का जिसके लिए पत्रकारिता एक…
उमाशंकर चौधरी की कविताएं
उमा शंकर चैधरी की कविताएंः- उमाशंकर चौधरी की कविताओं का अपना स्वर है जो समकालीन कविता में उनको सबसे अलग…
एक बड़े आदर्श का यथार्थवादी अंत?
देश जिसे अपने आदर्श की तरह अपनाने के लिए तैयार था वह तो कमबख्त हिंदी कहानियों के उस यथार्थ की…
क्या हिन्दी में भी कोई ‘चेतन भगत’ आ सकता है?
हाल में ही हिंदी में कुछ किताबें आई तो यह चर्चा शुरू हो गई कि हिंदी में चेतन भगत आने…
भालचंद्र नेमाड़े को सुनते हुए ‘नाकोहस’ कहानी की याद
परसों की ही तो बात है. राजकमल प्रकाशन का स्थापना दिवस समारोह था, उसमें भालचंद्र नेमाड़े को हिंदी में भारतीय…
क्या हिंदी प्रकाशन जगत में नए दौर की शुरुआत हो गई है?
कल की दोपहर बड़ी ख़ास थी. वसंत की दोपहरें आम तौर पर उदास करने वाली होती हैं. धूप की गर्मी,…
अमेजन क्रांति के दौर में हिदी किताबें और पाठक
परसों बिहार के कटिहार से संजय जी का फोन आया था. फोन उठाते ही उन्होंने कहा कि वे करीब एक…
प्रेम खाप के लिए है अभिशाप तो व्यक्ति के लिए अमर फल!
ऐसा नहीं है कि 2015 के पुस्तक मेले में मुझे सिर्फ रवीश कुमार का ‘इश्क में शहर होना’ ही पसंद…
हिंदी में ईबुक क्रांति आने वाली है?
विश्वपुस्तक मेले में हिंदी प्रकाशकों के हॉल में सबसे अधिक चर्चा थी ईबुक की. इस चर्चा के दो कारण थे.…



