आज स्वरांगी साने की कविताएं. कुछ कवि ऐसे होते हैं जो चुपचाप लिखते चले जाते हैं, छपने-छपाने के मोह में…
फौज़िया रेयाज़ की कहानी ‘ख़ुशी की तलाश’
सच बताऊँ तो समकालीन मध्यवर्गीय जीवन की जद्दोजहद हिंदी के लेखक कहाने वाले लेखकों में अब कम दिखाई देती है.…
ईश्वर तक जाने वाली पहली राह है प्रार्थना और दूसरी आनंद!
गीताश्री का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है. बस इतना और याद दिलाता चलूँ कि पत्रकारिता, संपादकी की तमाम…
बिसरे संगीतकार की भूली याद
भारतीय सिनेमा के सुनहरे संगीतमय दौर के “वो तेरे प्यार का गम, एक बहाना था सनम” और ”जिक्र होता है जब कयामत का तेरे…
जहाँ ‘अलग दिखना और अलग होने में फर्क था’
इन दिनों अल्पना मिश्र के उपन्यास ‘अन्हियारे में तलछट चमका’ की बड़ी चर्चा है. आम तौर पर किसी साहित्यिक कृति…
मैं साहित्य की एक्स्ट्रा कैरीक्यूलर एक्टीविटीज़ में बहुत कमजोर रहा
13 सितम्बर को दिवंगत कवि भगवत रावत की जयंती थी. जीवन की आपाधापी में हम इतने उलझ गए हैं कि…
जो मेरी रचना का मित्र नहीं वह मेरा मित्र नहीं!
आज हिंदी दिवस है लेकिन बजाय रोने ढोने के या ‘जय हिंदी! जय हिंदी!’ का झंडा उठाने के बजाय आज…
पैशन, फ़न, रोमांस, लाइफ़ और लव की तलाश है ‘फाइडिंग फ़ैनी’
प्रसिद्ध लेखिका अनु सिंह चौधरी सिनेमा पर बहुत बारीकी से लिखती हैं, पढ़नेवालों को फिल्म फ्रेम दर फ्रेम समझ में…
लव जेहाद बनाम दिलजलियां
सदफ़ नाज़ धनबाद में रहती हैं, पत्रकारिता करती हैं. ‘लव जिहाद’ पर सोचने बैठी तो ऐसा व्यंग्य लिख गई कि…
मुक्तिबोध अचानक क्यों लोकप्रिय हो उठे?
कुछ साल पहले मुक्तिबोध की प्रासंगिकता को लेकर प्रसिद्ध विद्वान अपूर्वानंद का यह लेख जनसत्ता में प्रकाशित हुआ था। मुक्तिबोध…



