दुर्गा के बहाने कुछ कविताएँ लिखी हैं युवा कवयित्री विपिन चौधरी ने. एक अलग भावबोध, समकालीन दृष्टि के साथ. कुछ…
सचमुच आराम से चली गयी माँ
शिवमूर्ति हमारे समय के बेहतरीन गद्यकार हैं. उनके गद्य में जीवन को महसूस किया जा सकता है, इतना जीवंत गद्य.…
भारतीय भाषाओं का ‘समन्वय’
‘समन्वय’ के पुराने आयोजन का एक सत्र इण्डिया हैबिटेट सेंटर के वार्षिक साहित्यिक आयोजन ‘समन्वय’ का आयोजन इस बार 24-27…
एक-आध दिन मौसी के घर भी चले जाना चाहिए
संजय गौतम कम लिखते हैं लेकिन मानीखेज लिखते हैं. उदाहरण के लिए यही लेख जिसमें इब्ने इंशा की किताब \’उर्दू…
एक-आध दिन मौसी के घर भी चले जाना चाहिए
संजय गौतम कम लिखते हैं लेकिन मानीखेज लिखते हैं. उदाहरण के लिए यही लेख जिसमें इब्ने इंशा की किताब \’उर्दू…
एक-आध दिन मौसी के घर भी चले जाना चाहिए
संजय गौतम कम लिखते हैं लेकिन मानीखेज लिखते हैं. उदाहरण के लिए यही लेख जिसमें इब्ने इंशा की किताब ‘उर्दू…
‘अरे! तुम! उमराव जान अदा !’
रोहिणी अग्रवाल एक सजग आलोचक और संवेदनशील कथाकार हैं. उनके इस लेख में उनके लेखन के दोनों रूप मुखर हैं.…
दबाव आप पर तब नहीं, अब आया है
\’लमही सम्मान\’ के सम्बन्ध में सम्मान के संयोजक और \’लमही\’ पत्रिका के संपादक विजय राय द्वारा यह कहे जाने पर…
दबाव आप पर तब नहीं, अब आया है
\’लमही सम्मान\’ के सम्बन्ध में सम्मान के संयोजक और \’लमही\’ पत्रिका के संपादक विजय राय द्वारा यह कहे जाने पर…
दबाव आप पर तब नहीं, अब आया है
‘लमही सम्मान’ के सम्बन्ध में सम्मान के संयोजक और ‘लमही’ पत्रिका के संपादक विजय राय द्वारा यह कहे जाने पर…



