यह समय हमारी कल्पनाओं से परे है
‘देर आयद दुरुस्त आयद’- यह मुहावरा अंजू शर्मा के सन्दर्भ में सही प्रतीत हो है. उन्होंने कविताएँ लिखना शायद देर…
मनीषा कुलश्रेष्ठ की कहानी ‘मौसमों के मकान सूने हैं’
मनीषा कुलश्रेष्ठ हमारी भाषा की एक ऐसी लेखिका हैं जिनको पाठकों और आलोचकों की प्रशंसा समान रूप से मिली हैं. उनकी…
संवाद और संवेदना की रेसिपी और लंचबॉक्स
यह सिर्फ ‘लंचबॉक्स‘ फिल्म की समीक्षा नहीं है. उसके बहाने समकालीन मनुष्य के एकांत को समझने का एक प्रयास…
शैलप्रिया की कविताएँ
आज शैलप्रिया जी की कविताएँ प्रियदर्शन की भूमिका के साथ- जानकी पुल. ================================================== 18 साल पहले मां नहीं रही। तब…
एक गरिमामयी पुरस्कार की शुरुआत
शैलप्रिया स्मृति सम्मान एक दिसंबर 1994 को झारखंड की सुख्यात कवयित्री और स्त्री-संगठनों से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता शैलप्रिया का कैंसर…
एक गरिमामयी पुरस्कार की शुरुआत
शैलप्रिया स्मृति सम्मान एक दिसंबर 1994 को झारखंड की सुख्यात कवयित्री और स्त्री-संगठनों से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता शैलप्रिया का कैंसर…



