आख़िर एकांगिता ही तो अश्लीलता है!

‘कथादेश’ में शालिनी माथुर के लेख के प्रकाशन के बाद अनामिका और पवन करण की कविताओं पर वाद-विवाद-संवाद का लंबा…

पवन करण के रुदन से अनामिका की खिलखिलाहट क्या बेहतर है?

वरिष्ठ लेखक-पत्रकार राजकिशोर के लेख ‘यह (उनकी) पोर्नोग्राफी नहीं, (आप की) गुंडागर्दी है’ को पढकर यह टिप्पणी दीप्ति गुप्ता ने…

शिवमूर्ति: हमें नयी पीढ़ी के लेखन पर विश्वास रखना होगा.

  2012 में जब शिवमूर्ति जी 60 साल के हुए थे तो उनसे मैंने यह बातचीत की थी। आज उनकी…

यह (उनकी) पोर्नोग्राफी नहीं, (आप की) गुंडागर्दी है

अनामिका और पवन करण की कविताओं पर ‘कथादेश’ में शालिनी माथुर के लेख के प्रकाशन के बाद उन कविताओं के…

कुछ भी ठोस नहीं रहता, सब पिघलता जा रहा है

युवा मीडिया समीक्षक विनीत कुमार की पुस्तक ‘मंडी में मीडिया’ की यह समीक्षा मैंने लिखी है. आज ‘जनसत्ता’ में प्रकाशित…

अनामिका की कविता ‘ब्रेष्ट कैंसर और पवन करण की कविता ‘स्तन’

  अनामिका की यह कविता और पवन करण की कविता ‘स्तन’ प्रस्तुत है जिसको लेकर शालिनी माथुर, दीप्ति वर्मा, उद्भ्रांत…

मार्केस की कहानी ‘मंगलवार की दोपहर’

आज मार्केस की एक कहानी. कहानी का अनुवाद कवि नरेन्‍द्र जैन ने किया है- जानकी पुल  ============================================================ ट्रेन रेतीली चट्टानों की…

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