राकेश श्रीमाल की सात नई कविताएँ

राकेश श्रीमाल महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में एक पत्रिका के संपादक हैं, लेकिन वे मूलतः कवि हैं. जीवन के छोटे छोटे अनुभवों को कविता के शिल्प में ढालने की कला में सिद्धहस्त हैं. प्रस्तुत हैं उनकी कुछ नई कविताएँ- मॉडरेटर
============
एक
—–
कल दोपहर मिलना तुम
उन्हीं सड़कों पर
उन्हीं पलों को जीते हुए
पुराने कहे शब्दों को याद करते हुए
लगभग
धूप में भीगते हुए
दो
——
धूप तुम्हें
छतरी में ही कैद नहीं कर लेती
वह जमीन पर गिरती
तुम्हारी परछाई की परिधि में
तुम्हें अपने भीतर समेट लेती है
मैं
तुम्हारें साथ चलते हुए
उस छाया में
 तुम्हें देखता हूँ
तुम्हारी छाया
मुझे नहीं देख पाती
तीन
——-
जमीन पर गिरती
छतरी की परछाई में
जब तुम मुस्कराती हो
मेरी परछाई का एक हिस्सा भी
मुस्कराकर साथ देने लगता है
हम चिलचिलाती धूप में
परछाइयों में ही मिलते हैं
परछाइयों में ही
कुछ देर बसते हैं
विदा होते समय
परछाइयों को
अपने साथ ही छिपा लेते हैं वहाँ
जहाँ हम
एक दूसरे को छिपा लेते हैं
चार
——–
सड़क पर चलती
तुम्हारी छतरी की परछाई से
तुम्हारें पैरों के समीप आ
धूप भी धीरे-धीरे
तुम्हारें साथ चलने लगती है
क्या धूप
जमीन पर अदृश्य लेटकर
छतरी से ढँके तुम्हारें चेहरे को देखती है
या फिर
वह भी चुपचाप सुनती होगी
हमारी कही और अनकही बातें
तुम्हारें चेहरे पर
धूप के ना होने की आभा है
जमीन पर बिखरी धूप के पास
तुम्हारें होने की परछाई है
कोई नहीं
जो परछाई से कह सके
कि सरकती परछाई ही
अब किसी का जीवन है
पाँच
——
सड़क पर चलती
धूप की तुम्हारी छाया में
तुम्हारी मुस्कराहट
धूप की तरह ही चमकती है
छतरी चुपचाप देखती रहती है
तुम्हारी हँसी
छतरी को अधिक हिला देती है
और सड़क पर गिरती छाया को भी
हिलती रहती है
छाया में गिरी तुम्हारी मुस्कराहट भी
छह
——-
धूप तुम्हारे बरामदे से होकर
दिन में एक निश्चित समय पर
तुम्हारी कुर्सी पर बैठ जाती है
जब तुम किताब पढ़ते हुए
कुर्सी पर बैठती हो
धूप तुम्हारे ऊपर बैठी रहती है
धूप तुम्हारे बालों से
फिसलती हुई लगती है
तुम्हारे होंठो पर
एकाकार बन
होंठ ही बन जाती है
तुम्हारी आँखों से
तुम्हारे पढ़े जा रहे
शब्दों को पढ़ने लगती है
तुम किताब को
धूप के दायरे में लाकर पढ़ रही हो
किताब के शब्द भी
धूप को देख रहे हैं
इतना कुछ देखती है धूप
क्या शब्दों का देखना देख पा रही होगी
तुम्हारी तरह शब्द भी
धूप में भीगे हुए हैं
शब्द
तुम्हारे पढ़े जाने में सूखते जा रहे हैं
तुम शब्दों को पढ़ते हुए
सतत भीगती जा रही हो
सात
——-
तुम्हारे कमरे की खूंटी पर
टँगी छतरी
जब तुम अपने हाथ में ले लेती हो
छतरी अपनी नींद के बाहर आ
सोचती होगी
धूप से मिलने का समय आ गया
अब वह धूप में भीगेगी
एक हाथ
उसे थामे होगा
पता नहीं
कितनी देर तक
और कहाँ जाना होगा उसे
वह एक गुमी हुई छतरी है
उसे खूंटी पर टँगे सोए-सोए
पिछली मालकिन याद आती रहती है
अगर वह फिर खो गई
तो उसे पता है
यह नई मालकिन अफसोस जताएगी
याद नहीं करेगी
सड़क आ गई है
छतरी धूप में चमक रही है
बहुत दिनों बाद
छतरी बहुत सारे लोग देख रही है
और बहुत सारी छतरियां भी
सड़क के उस पार दिखते पार्क को
वह पहचान गई
जिसकी एक बेंच पर
पिछली मालकिन ने
भूल से उसे छोड़ दिया था
फिर वह उस हाथ में आ गई
जो अभी उसे पकड़े
सड़क पर चल रही है
तुम्हारे हाथ में पकड़ी
सड़क पर चलती छतरी
घबराती है अपने बन्द किए जाने से
जैसे तुम घबराती हो
अपने मन को खोलने से
===============

दुर्लभ किताबों के PDF के लिए जानकी पुल को telegram पर सब्सक्राइब करें

https://t.me/jankipul

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

1 mins
WordPress Center Ankara Escort: Beypazarı Escort, Pursaklar Escort, Etimesgut Escort İstanbul Escort: Esenyurt Escort, Bahçelievler Escort, Maltepe Escort Bursa Escort: Gürsu Escort, Keles Escort, İznik Escort What are the best budget smartphones available in 2025? Reason Why Everyone Love Travel Doubts About Lifestyle You Should Clarify Appointment Buddy – Online Appointment Booking WP Plugin Bookly Multisite (Add-on) Wiloke FAQs Prite Elementor Addon Smart Photo Gallery – Responsive WordPress Plugin Responsive HTML5 Audio Player PRO WordPress Plugin Stripe Payment Add-on for BookPro Plugin Product Price Info For WooCommerce WooCommerce Order Status Per Product Smart NFT BEP/ERC-20 Custom token standard (Addons) Approve New User Registration WordPress & WooCommerce Plugin