दुष्यंत की कहानी ‘उलटी वाकी धार’

हाल में ही युवा लेखक दुष्यंत का कहानी संग्रह पेंगुइन से आया है ‘जुलाई की एक रात’. समकालीन जीवन के…

हवाओं को मनाता हूं परिंदे रूठ जाते हैं

आज दुष्यंत की कुछ गज़लें-कुछ शेर. जीना, खोना-पाना- उनके शेरों में इनके बिम्ब अक्सर आते हैं. शायद दुष्यंत कुमार की…

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