वे हर बात का जवाब देते थे, सबको जवाब देते थेOctober 29, 20131 mins110जिन दिनों सीतामढ़ी में इंटर का विद्यार्थी था तो अपने मित्र श्रीप्रकाश की सलाह पर मैंने एक… continue Reading..
‘समन्वय’ अब अगले बरस का इंतज़ार है!October 28, 20131 mins15शाम को पार्थो दत्ता सर ने फोन किया. पूछा- उस लेखक का क्या नाम है जिसके बारे… continue Reading..
‘समन्वय’ में भोजपुरी और प्रकाश उदयOctober 24, 20131 mins7आज से इण्डिया हैबिटेट सेंटर का भारतीय भाषा महोत्सव ‘समन्वय’ शुरू हो रहा है. इसमें इस बार…ब्लॉग continue Reading..
स्त्री विमर्श सबसे ज़्यादा गलत समझा जाने वाला शब्द हैOctober 21, 20131 mins8पिछले कुछ महीनों में ‘बिंदिया’ पत्रिका ने अपनी साहित्यिक प्रस्तुतियों से ध्यान खींचा है. जैसे कि नवम्बर अंक में… continue Reading..
कुछ कविताएँ कुमार अनुपम कीOctober 19, 20131 mins0कुमार अनुपम की कविताएँ समकालीन कविता में अपना एक अलग स्पेस रचती है- \’अपने समय की शर्ट में… prabhatcontinue Reading..
कुछ कविताएँ कुमार अनुपम कीOctober 19, 20131 mins0कुमार अनुपम की कविताएँ समकालीन कविता में अपना एक अलग स्पेस रचती है- \’अपने समय की शर्ट में… prabhatcontinue Reading..
कुछ कविताएँ कुमार अनुपम कीOctober 19, 20131 mins20कुमार अनुपम की कविताएँ समकालीन कविता में अपना एक अलग स्पेस रचती है- ‘अपने समय की शर्ट में…ब्लॉग continue Reading..
मैत्रेयी खुद रही हैं स्त्री-देह विमर्श की पैरोकार- चित्रा मुद्गलOctober 17, 2013August 6, 20251 mins20पिछले कुछ महीनों में ‘बिंदिया’ पत्रिका ने अपनी साहित्यिक प्रस्तुतियों से ध्यान खींचा है. जैसे कि नवम्बर…Blog prabhatcontinue Reading..