• Blog
  • सुरेन्द्र मोहन पाठक और उनका नया उपन्यास ‘क़हर’

     

    मैं पहले ही निवेदन करना चाहता हूँ कि मैं सुरेन्द्र मोहन पाठक के अनेक उपन्यास पढ़े ज़रूर हैं लेकिन उनका फ़ैन नहीं रहा। लेकिन उनके विमल सीरिज़ की बात ही कुछ और है। विमल, जो क़ानून की नज़र में अपराधी है लेकिन वह एक ऐसा किरदार है जिससे आपको प्यार हो जाएगा। असल में सुरेन्द्र मोहन पाठक की यह सीरिज़ हिंदी के यथार्थवादी साहित्य के बरक्स रखकर पढ़ी जानी चाहिए। जिसे हम गम्भीर यथार्थवादी साहित्य कहते हैं पिछले कुछ दशकों में वह भी एक फ़ॉर्म्युला बन गया है। समाज जितनी तेज़ी से बदला है यथार्थवादी साहित्य के मानक उतनी तेज़ी से नहीं बदले। अकारण नहीं है कि हिंदी में लोकप्रिय कहा जाने वाला साहित्य पाठकों को पसंद आ रहा है। हिंदी का नया पाठक उससे कनेक्ट करता है, तथाकथित यथार्थवादी साहित्य से वह कनेक्ट नहीं कर पाता है शायद। ख़ैर, ‘क़हर’ उपन्यास आया है। सुरेन्द्र मोहन पाठक के विमल सीरिज़ का कोई उपनायास लम्बे समय बाद आया है। विमल मुंबई से अपराध की दुनिया छोड़कर दिल्ली में आम शहरी का जीवन जीने आया है। अपनी पत्नी और बच्चे के साथ। लेकिन वह अपराध छोड़ने की जितनी कोशिश करे अपराध उसे नहीं छोड़ता। वह एक ऐसा अपराधी किरदार है जो लगातार अपराधियों से लड़ता रहा है। दिल्ली में उसके आने के कुछ दिन बाद कुछ ऐसा हो जाता है कि उसको मजबूरन फिर से अपनी उसी अंधेरी दुनिया में जाना पड़ता है जिसे छोड़ने की उसने बार बार कोशिश की।

    विमल सीरिज़ के अन्य उपन्यासों की तरह ही इस उपन्यास की ख़ासियत यही है कि यह आम आदमी के रोज़मर्रा के जीवन से जुड़ा लगता है। आजकल सड़कों पर छोटे-बड़े तमाम तरह के अपराध होते हैं जिनका कोई हल पुलिस के पास नहीं होता। मेरी एक दोस्त का महँगा मोबाइल फ़ोन दरियागंज के इलाक़े में छीन लिया गया पुलिस ने रपट तक नहीं लिखी। साकेत में मनोहर श्याम जोशी की पत्नी का महँगा हार उनके घर के सामने सड़क पर स्नैचर छीन कर भाग गया, पुलिस सिवाय रूटीन विजिट के कुछ नहीं कर पाई। आम आदमी रोज़ रोज़ ऐसी तमाम तरह की दुर्घटनाओं का सामना करता है जिससे बचाने वाला उसे कोई नहीं होता। एक सभ्य नागरिक समाज में सरे आम महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार होता है लोग देखकर भी नहीं देखते। लेकिन विमल ऐसा नहीं है। वह सबके न्याय के लिए लड़ता है, बेज़ुबानों की आवाज़ बनता है। भले इसके लिए वह क़ानून की नज़र में अपराधी क़रार दिया जाए लेकिन आम आदमी की नज़र में मसीहा है।

    समाज में आम आदमी अपने दुखों से मुक्ति पाने के लिए लगातार किसी मसीहा, किसी अवतार की प्रतीक्षा करता है। राजनीति के जितने बड़े अवतार, मसीहा आए उन सबने जनता की उम्मीदों, उनकी आशाओं के साथ छल किया। जनता उसी तरह सड़क पर लुटती रही, मसीहा सत्ता लूटते रहे। लेकिन विमल कभी छल नहीं करता। वह तो ख़ुद आम आदमी है, उनके बीच से निकला मसीहा है।

    हिंद पॉकेट बुक्स से प्रकाशित उपन्यास ‘क़हर’ ने एक बार फिर यह साबित किया है कि सुरेन्द्र मोहन पाठक को क्यों लोकप्रिय साहित्य का बादशाह कहा जाता है। लगभग अस्सी की उम्र में इतना कसा हुआ, साधारण जीवन में घटने वाली असाधारण घटनाओं से कसा हुआ उपन्यास लिखकर पाठक जी ने एक बार फिर यह बता दिया है कि न तो उनके कलाम की धार कम हुई है न ही आम आदमी के रोज़मर्रा के जीवन पर उनकी पकड़। अकारान नहीं है कि इस उपन्यास ने अब तक बिक्री के अनेक मानक तोड़ दिए हैं। यह एक नए तरह का यथार्थवादी उपन्यास है जिससे मेरी तरह आप भी कनेक्ट करने लगेंगे। पढ़कर तो देखिए।

    348 पृष्ठ के इस उपन्यास की क़ीमत महज़ 175 रुपए है।

    ==========

    लेखक- प्रभात रंजन 

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    1 mins
    WordPress Center Ankara Escort: Beypazarı Escort, Pursaklar Escort, Etimesgut Escort İstanbul Escort: Esenyurt Escort, Bahçelievler Escort, Maltepe Escort Bursa Escort: Gürsu Escort, Keles Escort, İznik Escort What are the best budget smartphones available in 2025? Reason Why Everyone Love Travel Doubts About Lifestyle You Should Clarify Personalization for WPBakery Page Builder Smooth Zoom Pan – jQuery Image Viewer WP News and Scrolling Widgets Pro – WordPress News Plugin jQuery TimelineXML Read Aloud Plugin Real-Time Text-to-Speech for WordPress Keyword Linking for WordPress Portfolio and Gallery Grid Layout with Carousel for WordPress BWL Poll Manager WooCommerce Create A Drawer – Composite Product Builder Plugin BookPro – Appointment Booking WordPress Plugin