बुकर पुरस्कार प्राप्त ‘ब्रिंग अप द बॉडीज’ का एक अंश हिंदी में

इस साल मैन बुकर पुरस्कार हिलेरी मैंटल को उनके उपन्यास ‘ब्रिंग अप द बॉडीज’ पर मिला है. यह एक ऐतिहासिक उपन्यास है. इससे पहले उनको ऐतिहासिक उपन्यास \’वोल्फ हॉल\’ के लिए २००९ में बुकर मिल चुका है. \’ब्रिंग अप द बॉडीज’ उसी उपन्यास का सीक्वेल है. प्रस्तुत है. इस पुरस्कृत उपन्यास का एक अंश, जिसका अनुवाद मैंने किया है और जो कल नवभारत टाइम्स में प्रकाशित हुआ था- प्रभात रंजन.
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थॉमस क्रॉमवेल इस समय करीब पचास साल के हैं. उनका शरीर मेहनतकशों जैसा है, गठीला, उपयोगी, मोटापे से दूर. उनके बाल काले हैं, जो अब कुछ-कुछ सफ़ेद होने लगे हैं, और उनके पीली मोटी त्वचा, जो लगता है इसलिए बनी है कि बारिश और सूरज दोनों से उनका बचाव हो सके, जिसके कारण लोग उनके पिता को आयरिश समझते और इसकी वजह से उनकी उपेक्षा करते हैं, उनका मजाक उड़ाते हैं, जबकि असल में वे पुतनी में शराब बनाने का काम करते थे और लुहारगिरी का, कटाई का काम भी करते, एक ऐसा आदमी जिसका दखल हर काम में होता है, लड़ाई-झगड़ा कर लेने वाला, शराब के नशे में धुत्त एवं गुस्सैल, एक ऐसा आदमी जो अक्सर कानून के सामने होता किसी को पीट देने के लिए, किसी को धोखा देने के लिए. इस तरह के आदमी के बेटे ने इतनी ऊंचाई कैसे हासिल कर ली यह सारा यूरोप पूछता है. कुछ कहते वह रानी के परिवार से आया था. कुछ कहते यह हुआ स्वर्गीय कार्डिनल वोल्सी की वजह से; क्रोमवेल उनका खास था तथा उनके लिए पैसे बनाया करता  और उनके राज जानता था. कुछ कहते वह सौर्सेरर्स की संगत में आता-जाता था. वह लड़कपन के दिनों से ही अलग किस्म का था, भाड़े का सिपाही, ऊन का व्यापारी, बैंकर. कोई नहीं जानता कि वह कहां है, किससे मिलता है, न ही उसे बताने की कोई जल्दी रहती. वह कभी राजा की सेवा में नहीं जाता, वह अपनी क्षमताओं को अपनी प्रतिभा को जानता था और अपने लिए ईनाम का पक्का इंतजाम रखता था; पद, दस्तूरी, पदवी, बंगले, जमीन-जायदाद. अपना काम करवाने का उसका अपना खास तरीका था, वह या तो किसी को प्रभावित कर लेगा या उसे घूस दे देगा, या तो उसकी खुशामद से या उसे धमका कर. वह उस आदमी को बता देगा कि उसकी दिलचस्पी किस चीज़ में है, वह उस आदमी को उसके अपने बारे में ही कुछ ऐसा बता देता जो खुद उस आदमी को पता नहीं होता था. हर दिन प्रमुख सचिव कुलीनों के साथ सौदा करता, अगर वह चाहते तो उनको एक झटके में उड़ा देते, मानो वह को कीट-पतंग हो. इसके ध्यान में रखते हुए वह अपनी विनम्रता के लिए जाना जाता है, अपने शांत चित्तता के लिए और इंग्लैण्ड के व्यापार को लेकर अपनी एकाग्रता के कारण. उसको अपने बारे में बताने की आदत नहीं है. अपनी सफलताओं के बारे में बात करने की उसकी आदत नहीं है. लेकिन जहां कहीं भी भाग्य उसकी प्रतीक्षा में होता वह वहां मौजूद होता, उसकी दहलीज पर, हलकी सी संकोच भरी खटखटाहट के साथ दरवाजा खोलने के लिए तैयार.

ऑस्टिन में उसके सिटी हाउस में उसकी आदमकद तस्वीर दीवार पर टंगी चिंता में डूबी दिखाई देती है; ऊन और फर में लपेटी हुई उसकी तस्वीर, उसके हाथ में एक कागजात है मानो वह उसमें कुछ ध्यान से पढ़ रहा हो. हैंस ने एक टेबल पीछे खिसकाते हुए कहा, थॉमस आपको हंसना नहीं चाहिए, और उस आधार पर उन्होंने आगे काम किया. उसने जब अपनी आदमकद तस्वीर को बन जाने के बाद देखा तो कहा, ‘हे भगवान, मैं इसमें किसी हत्यारे की तरह लग रहा हूं;’ और उसके बेटे ग्रेगरी ने कहा, आपको पता नहीं? उसके दोस्तों और जर्मनी में उसके चाहने वालों के लिए इसकी प्रतियाँ बनवाई जा रही हैं. शुरुआत कहां से करें क्रोमवेल? कुछ ने उसकी चमकती छोटी आंखों से शुरुआत की, कुछ ने उसके हैट से. चाहे जहां से उन्होंने शुरुआत की हो उसका प्रभाव वही है: अगर उसे आपसे कोई शिकवा है तो आप उससे चांद ढलने के बाद के अँधेरे में मिलना पसंद नहीं करेंगे. उसके पिता वाल्टर कहा करते थे, ‘मेरे बेटे थॉमस, उसे खराब ढंग से देखोगे तो वह तुम्हारी आंखें निकाल लेगा, उसे ठोकर मारोगे तो वह तुम्हारी टांगें काट लेगा. लेकिन अगर तुम उसे कुछ नहीं करोगे तो वह बहुत अच्छा आदमी है. और वह किसी को अपने साथ एक ड्रिंक लेने के लिए कह देगा.’        

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इस साल मैन बुकर पुरस्कार हिलेरी मैंटल को उनके उपन्यास ‘ब्रिंग अप द बॉडीज’ पर मिला है. यह एक ऐतिहासिक उपन्यास है. इससे पहले उनको ऐतिहासिक उपन्यास ‘वोल्फ हॉल’ के लिए २००९ में बुकर मिल चुका है. ‘ब्रिंग अप द बॉडीज’ उसी उपन्यास का सीक्वेल है. प्रस्तुत है. इस पुरस्कृत उपन्यास का एक अंश, जिसका अनुवाद मैंने किया है और जो कल नवभारत टाइम्स में प्रकाशित हुआ था- प्रभात रंजन.
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थॉमस क्रॉमवेल इस समय करीब पचास साल के हैं. उनका शरीर मेहनतकशों जैसा है, गठीला, उपयोगी, मोटापे से दूर. उनके बाल काले हैं, जो अब कुछ-कुछ सफ़ेद होने लगे हैं, और उनके पीली मोटी त्वचा, जो लगता है इसलिए बनी है कि बारिश और सूरज दोनों से उनका बचाव हो सके, जिसके कारण लोग उनके पिता को आयरिश समझते और इसकी वजह से उनकी उपेक्षा करते हैं, उनका मजाक उड़ाते हैं, जबकि असल में वे पुतनी में शराब बनाने का काम करते थे और लुहारगिरी का, कटाई का काम भी करते, एक ऐसा आदमी जिसका दखल हर काम में होता है, लड़ाई-झगड़ा कर लेने वाला, शराब के नशे में धुत्त एवं गुस्सैल, एक ऐसा आदमी जो अक्सर कानून के सामने होता किसी को पीट देने के लिए, किसी को धोखा देने के लिए. इस तरह के आदमी के बेटे ने इतनी ऊंचाई कैसे हासिल कर ली यह सारा यूरोप पूछता है. कुछ कहते वह रानी के परिवार से आया था. कुछ कहते यह हुआ स्वर्गीय कार्डिनल वोल्सी की वजह से; क्रोमवेल उनका खास था तथा उनके लिए पैसे बनाया करता  और उनके राज जानता था. कुछ कहते वह सौर्सेरर्स की संगत में आता-जाता था. वह लड़कपन के दिनों से ही अलग किस्म का था, भाड़े का सिपाही, ऊन का व्यापारी, बैंकर. कोई नहीं जानता कि वह कहां है, किससे मिलता है, न ही उसे बताने की कोई जल्दी रहती. वह कभी राजा की सेवा में नहीं जाता, वह अपनी क्षमताओं को अपनी प्रतिभा को जानता था और अपने लिए ईनाम का पक्का इंतजाम रखता था; पद, दस्तूरी, पदवी, बंगले, जमीन-जायदाद. अपना काम करवाने का उसका अपना खास तरीका था, वह या तो किसी को प्रभावित कर लेगा या उसे घूस दे देगा, या तो उसकी खुशामद से या उसे धमका कर. वह उस आदमी को बता देगा कि उसकी दिलचस्पी किस चीज़ में है, वह उस आदमी को उसके अपने बारे में ही कुछ ऐसा बता देता जो खुद उस आदमी को पता नहीं होता था. हर दिन प्रमुख सचिव कुलीनों के साथ सौदा करता, अगर वह चाहते तो उनको एक झटके में उड़ा देते, मानो वह को कीट-पतंग हो. इसके ध्यान में रखते हुए वह अपनी विनम्रता के लिए जाना जाता है, अपने शांत चित्तता के लिए और इंग्लैण्ड के व्यापार को लेकर अपनी एकाग्रता के कारण. उसको अपने बारे में बताने की आदत नहीं है. अपनी सफलताओं के बारे में बात करने की उसकी आदत नहीं है. लेकिन जहां कहीं भी भाग्य उसकी प्रतीक्षा में होता वह वहां मौजूद होता, उसकी दहलीज पर, हलकी सी संकोच भरी खटखटाहट के साथ दरवाजा खोलने के लिए तैयार.

ऑस्टिन में उसके सिटी हाउस में उसकी आदमकद तस्वीर दीवार पर टंगी चिंता में डूबी दिखाई देती है; ऊन और फर में लपेटी हुई उसकी तस्वीर, उसके हाथ में एक कागजात है मानो वह उसमें कुछ ध्यान से पढ़ रहा हो. हैंस ने एक टेबल पीछे खिसकाते हुए कहा, थॉमस आपको हंसना नहीं चाहिए, और उस आधार पर उन्होंने आगे काम किया. उसने जब अपनी आदमकद तस्वीर को बन जाने के बाद देखा तो कहा, ‘हे भगवान, मैं इसमें किसी हत्यारे की तरह लग रहा हूं;’ और उसके बेटे ग्रेगरी ने कहा, आपको पता नहीं? उसके दोस्तों और जर्मनी में उसके चाहने वालों के लिए इसकी प्रतियाँ बनवाई जा रही हैं. शुरुआत कहां से करें क्रोमवेल? कुछ ने उसकी चमकती छोटी आंखों से शुरुआत की, कुछ ने उसके हैट से. चाहे जहां से उन्होंने शुरुआत की हो उसका प्रभाव वही है: अगर उसे आपसे कोई शिकवा है तो आप उससे चांद ढलने के बाद के अँधेरे में मिलना पसंद नहीं करेंगे. उसके पिता वाल्टर कहा करते थे, ‘मेरे बेटे थॉमस, उसे खराब ढंग से देखोगे तो वह तुम्हारी आंखें निकाल लेगा, उसे ठोकर मारोगे तो वह तुम्हारी टांगें काट लेगा. लेकिन अगर तुम उसे कुछ नहीं करोगे तो वह बहुत अच्छा आदमी है. और वह किसी को अपने साथ एक ड्रिंक लेने के लिए कह देगा.’        

5 thoughts on “बुकर पुरस्कार प्राप्त ‘ब्रिंग अप द बॉडीज’ का एक अंश हिंदी में

  1. प्रभात आपको बधाई..आपका अनुवाद सहज होता है.

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