शुभम श्री की नई कविताएँ

ऐसे समय में जब कविगण अपनी लिखी जा रही कविताओं की पंक्तियाँ तक साझा करते हैं शुभम श्री कविताओं को प्रकाशित करवाने के मामले में संकोची हैं. जबकि हिंदी कविता के मिजाज को उन्होंने बदलकर रख दिया है. यहाँ प्रस्तुत है उनकी ‘काव्य प्रसून सीरीज’ की कविताएं युवा लेखिका सुदीप्ति की संक्षिप्त भूमिका के साथ- मॉडरेटर 
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[शुभम श्री अक्का ‘सूभम देवी’ हिंदी क्षेत्र में पायी जाने वाली विलक्षण विद्रोही प्रतिभा हैं. पहला विद्रोह तो वहीँ किया कि अपनी प्रखरता को साहित्य पढ़ने में खर्च करने का निर्णय लिया. उसके बाद यह कि घरवालों की अंग्रेज़ी साहित्य पढ़ने की ‘सही’ सलाह को दरकिनार कर हिंदी साहित्य पढ़ने आ गयीं. अब हिंदी साहित्य से प्रेम होना, उसे पढ़ने की इच्छा करना एक अलग बात है, पर किसी विश्वविद्यालय में उसका अध्ययन करना बिलकुल दूसरी. ऊपर से तुर्रा यह कि हिंदी विभाग की छात्रा होकर भी तेवर और त्वरा दोनों से हाथ नहीं धोया.  शुभम की इन कविताओं को पढ़ते हुए सबसे पहली बात जो मेरे दिमाग में उभरी, वह यह कि एक विश्वविद्यालय के कैम्पस में रहते हुए भी उससे रचनात्मक दूरी/तटस्थता बनाए रखने में वे अद्भुत रूप से सक्षम दिख रही हैं. इनकी कविताओं में भारत के किसी भी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग को पाया जा सकता है. ये कवितायेँ किसी एक का काव्यात्मक बखान भर नहीं हैं. इन कविताओं में सधी हुई लाक्षणिकता है, अर्थ-व्यंजना है. ताज़ा मुहावरे हैं. कोई व्यक्ति-विशेष नहीं, वे तमाम आमफहम चरित्र हैं जिन्हें हिंदी का हर चेतस विद्यार्थी जाना-पहचाना महसूस करेगा. परिवेश के सत्य में गहरे पैठ उसे कहने का जैसा साहस और कहन की जो खास शैली शुभम के यहाँ दिखाई पड़ती है, वह अपने-आप में विशिष्ट है. काव्य प्रसून सीरीज’ की ये कवितायेँ हिंदी विभाग का त्रासद यथार्थ हैं. हिंदी पब्लिक स्फीयर को समझने में वास्तविक मददगार– सुदीप्ति]
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काव्य प्रसून सीरीज
(सस्वती सर्वोपमा सिरी रामचंद्र सुकुल महान आलोचक बनारस वाले के चरनन में सादर समर्पित)
-सूभम देवी
बिल्लू का दाख़िला

खंड-1

बिल्लू ने बहुत जोरदार पर्चा लिखा पीएचडी प्रवेश का
कबिर बरे आलूचक हे
रेनू लीखे है सताइस गो कहनी
नामौर जी कहे है कबीता की नयि परतीमान मे
अगेय जी अमिर आदमि थें
सुक्ल जी परसंसा करते हए दूबेदी जी आलूचना
अंतिम प्रश्न परेमचंद की सामाजिक चेतना
जिसका बिल्लू ने गर्दा छोड़ाया-
परेमचंद्र उत्तर परदेस मे जनम लीये थें, उनके बाबूजी का नाम नवाब राय था, उ भुक सें मर गयें थे
बिल्लू ने बंटा पीते हुए लल्लन को ललकारा
कलम तोर के लीखे हैं भायजी, अबरी फस किलास टौप रिजल्ट
लेकिन हरामजादा मास्टर अंधरा कोढ़िया
फैल नंबर दे दिया बिटीचो
खंड-2

बिल्लू हार नहीं माना, रार नई ठाना
दूबे जी के पास रोया
चौबे जी के पास गाया
पांडे जी की तरकारी लाया
सहाय जी का घर बदलवाया
सहाय जी ने शर्मा जी को फोन किया
शर्मा जी ने वर्मा जी को
वर्मा जी ने महेसर जी को कहलवाया
महेसर जी ने रामेसर जी को
बिल्लू इंटरव्यू देने आया
बेटा बैठो, आज नाश्ते में क्या खाया
दूद-रोटी-चिन्नी-केला
आहा अद्भुत
इस प्रकार बिल्लू ने विश्वविद्यालय में प्रवेश पाया

तिरबेदी जी का व्यक्तित्व-कृतित्व
आप शायद न जानते हों
ऐसा है कि तिरबेदी जी बड़े नामौर आलोचक हैं
जिस ज़माने में कहानियां लिखा करते थे
मोहन राकेश इनसे डिक्टेशन लेता था
निर्मल वर्मा लंदन से मज़मून मांगता था
और कविताएं तो पूछिए मत
लड़कियां खून से ख़त लिखा करती थीं कसम रामचंद्र शुक्ल की
ऐंवेई नहीं है भई, मेधावी व्यक्ति हैं
हिन्दी साहित्य के इतिहास में कुछ नहीं तो दस पन्ना कहीं नहीं गया है
तो जिन दिनों तिरबेदी जी का नागार्जुन, शमशेर, अज्ञेय, त्रिलोचन
गो कि सैकड़ो नामचीन अदीबों में उठना बैठना था
नेपाल की विदेश यात्रा कर आए थे
बस्ती के डिग्री कॉलेज में बकरियां गिनना अखरने लगा
और जैसी कि कहावत है- प्रतिभा साधन की मोहताज नहीं होती
सो तिरबेदी जी मन्नू के खलिहान पर दो घंटे पसीना बहाकर
कनस्तर भर शुद्ध सरसों तेल पेरवा आए
और वो मालिश की अपने गुरुजी की
बूढ़े की हड्डियां अस्सी पार भी दमदार हैं
बाबा बिसनाथ की किरपा से बलियाटिकी खतम हुई
और कापी कालेज नखलऊ नस्तर लींबू बोलते बोलते
तिरबेदी जी सर्वहारा, साम्राज्य, चेतना, मुक्ति दोहराने लगे
इस प्रकार तिरबेदी जी मालिश काल समाप्त कर बाबा काल में प्रविष्ट हुए
तत्पश्चात कई प्रकार के पवित्र तिकड़म और दान पुण्य करते हुए
कई काल तक पत्नी पुत्रादि संग सुखी जीवन व्यतीत किया
तिरबेदी जी का दैनिक जीवन
उठे
दातुन की
हवाई चप्पल में दौड़ लगाई
बेटी ने अंग्रेजी बोली
गर्व किया
रोटी सब्जी खाई
कार चलाई
यूनीवर्सिटी आए
तुलसीदास पढ़ाए
विद्यार्थियों को सदाचार सिखाया
रेसर बैक में ब्रा की स्ट्रेप देख विचलित हुए
भारतीय संस्कृति के पतन पर लेख लिखा
शिष्य आए
मालिश करवाए
चाय लाए
(इनके पास हजार का नोट था)
घर आए
दाल भात खाए
सोए
सीरियल देखा
पत्नी सो गई तो फेसबुक खोला
तिरेपन लड़कियों की तस्वीर लाइक की
तेईस पर कमेंट किया
तुम अपूर्व सुंदर हो
तेरह को इनबॉक्स किया
तुम्हारी याद आ रही है
तीन ने जवाब दिया
धन्यवाद सर
आप पिता समान हैं
आपका आशीर्वाद बना रहे

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