दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज की पूर्व प्राध्यापिका डॉक्टर विजया सती आजकल शिक्षा जगत से जुड़े संस्मरण लिख रही हैं।…
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जी का था ख़याल तो काहे जी लगाया
सुहैब अहमद फ़ारूक़ी पेशे से पुलिस अधिकारी हैं मिज़ाज से शायर। लेकिन आज उनका यह चुटीला लेख पढ़िए- ======================= ‘जी…
कॉलेज में कई जीवन वर्ष: विजया सती
हिंदू कॉलेज में दशकों हिंदी पढ़ाने वाली डॉक्टर विजया सती जी शिक्षा-जगत से जुड़े अपने अनुभवों को संस्मरण के रूप…
गुमनाम लेखक की डायरी: 5: विमलेश त्रिपाठी
युवा कवि विमलेश त्रिपाठी का यह स्तम्भ एक लम्बे अंतराल के बाद फिर से शुरु हो रहा है। लेखक…
आश्रम से बाहर जिन्दगी: विजया सती
दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज की पूर्व प्राध्यापिका ने विजया सती आजकल संस्मरण लिख रही हैं। उनके संस्मरण का पहला…
‘थोड़ी- सी ज़मीन थोड़ा आसमान’ की काव्यात्मक समीक्षा
यतीश कुमार बहुत दिनों बाद अपनी काव्यात्मक समीक्षा के साथ वापस लौटे हैं।इस बार उन्होंने जयश्री रॉय की किताब ‘थोड़ी-…
सिधपुर की भगतणें : स्त्री के स्वभाविक विद्रोह का प्रमाणिक आख्यान
लक्ष्मी शर्मा के उपन्यास ‘सिधपुर की भगतणें’ पर यह सुविचारित टिप्पणी लिखी है जितेंद्र विसारिया ने। आप भी पढ़…
दीवानावार प्रेम की तलाश का नॉवेल ‘राजा गिद्ध’
उर्दू लेखिका बानो क़ुदसिया के उपन्यास ‘राजा गिद्ध’ पर यह टिप्पणी लिखी है वरिष्ठ लेखिका जया जादवानी ने। सेतु प्रकाशन…
आश्रम में बचपन: विजया सती
आज पढ़िए विजया सती जी का यह संस्मरण ज़ी उनके बचपन के दिनों को लेकर है। विजया सती मैम दिल्ली…



