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  • जी का था ख़याल तो काहे जी लगाया

    सुहैब अहमद फ़ारूक़ी पेशे से पुलिस अधिकारी हैं मिज़ाज से शायर। लेकिन आज उनका यह चुटीला लेख पढ़िए-
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    ‘जी का बुरा हाल है जब से जी लगाया
    तुझे जी में बसाया तेरे हो लिए
    जी का था ख़याल तो काहे जी लगाया
    मुझे जी में बसाया ए जी बोलिये
    हो अब काहे पछताना के जी न लगे
    साथिया मैंने माना कि जी न लगे’
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    हज़रात!
    पिछले दिनों आशा पारेख साहबा को दादा साहब फाल्के पुरस्कार मिलने की घोषणा हुई थी। अपेक्षा के अनुरूप उनके द्वारा अभिनीत गानों को मीडिया में दिखाया जाने लगा। उपरोक्त अन्तरा उनकी सुपरहिट फ़िल्म ‘आया सावन झूम के’ के गीत से है। गाने के इस अन्तरे पर ख़ाकसार का जी आ गया है। अब नीचे पढ़िए। उम्मीद है कि आपका भी जी आ जाएगा।
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    *जी*।
    मेरे ख़याल में ‘अच्छा’ के बाद हिन्दोस्तानी भाषा में ‘जी’ शब्द, दूसरा ऐसा शब्द है जिसके इस्तेमाल के बहुत तरीक़े देखने, सुनने और पढ़ने को मिल जाते हैं।
    ‘जी’ का प्रथम दृष्टया अर्थ स्वीकृति से है मतलब, किसी सवाल के जवाब में निश्चयात्मक हाँ।
    ‘……क्या आपने खाना खा लिया?’
    ‘..जी’।
    मतलब कनफ़र्म्ड हाँ।
    लेकिन सवाल अगर किसी बड़े की तरफ़ से था तो इस निश्चयात्मक स्वीकृति को आपको ‘जी’ ही कहना पड़ेगा। यदि आपके मुख से ‘हाँ’ निकल गया तो धृष्टता की श्रेणी में आ जाएगा। इसीलिए हम बच्चों को सिखाते हैं कि बड़ों को जवाब में हाँ नहीं कहते, जी कहते हैं। समझ में आया जी।
    “समझ में आया जी” में आने वाले इस ‘जी’ का तात्पर्य आपको दिए गए सम्मान से है। जो आपको सम्बोधित करते समय ‘आपके’ बाद लगाया जाता है। जैसे सुहैब जी बैठिए। ज़्यादा सम्मान देना है तो कहते हैं, श्री सुहैब जी पधार रहे हैं। सम्मान की सर्वोच्च श्रेणी में यूँ कह दिया जाता है, आदरणीय सुहैब जी फ़ारूक़ी महोदय आ चुके हैं। देखिए कितना ‘जी’ लगाकर सम्मान किया जा सकता है!
    लेकिन यह सम्मान वाला ‘जी’ दिल से सम्बंधित हुआ। अर्थात जी, हृदय, हिवड़ा, जिया इत्यादि। यह वाला जी लौकिकता और अलौकिकता के बीच का मामला है। मानव शरीर विज्ञान अंग्रेज़ी में बोले तो एनाटोमी में इस जी से मन्तव्य माँस भर के उस लोथड़े से है जो रक्त संचरण में सिर्फ़ एक पम्प की हैसियत रखता है। लेकिन, मूर्त्त रूप से इस जी के अमूर्त्त अनुप्रयोगों का संचार व प्रसार, हृदय से आगे जान, प्राण जिगर, शरीर और आत्मा तक पहुंच जाता है। जी से जान तक लगा के देखिए। अगर जी नहीं है तो जान भी कुछ नहीं कर सकेगी। अब इस जी जिसके न होने से जान कुछ नहीं कर सकने वाली स्थिति में है, का अर्थ इच्छा यानी मर्ज़ी है। मतलब जी है तो जान हाज़िर वरना जान तो दूर की चीज़ आप जान उँगली पकड़ कर दिखाओ।
    अब आख़री बात बताता हूँ।
    वैवाहिक जीवन में ‘ए’ और ‘सुनो’ शब्दों के उपसर्गों के रूप में जी का अर्थ बिना दिमाग़ लगाए तत्परता से मात्र ‘हाँ जी’ में जवाब देना है। मेरा तात्पर्य ‘ए जी’ और ‘सुनो जी’ से हैं। इस वाले जी से पहले ‘हाँ’ प्रत्यय का प्रयोग करना यानी ‘हाँजी’ ही वैवाहिक जीवन की सफलता की गारंटी है। इसी में सद्गति और मोक्ष प्राप्ति है।
    दुआओं में याद रखिएगा।
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    अपेक्षा के अनुरूप=as expected
    अभिनीत=starring
    अन्तरा=verse of a song
    प्रथम दृष्टया=prima facie
    स्वीकृति=Acceptance
    निश्चयात्मक= definite
    निश्चयात्मक स्वीकृति=affirmative acceptance
    धृष्टता की श्रेणी=equel of impudence
    तात्पर्य=sense
    लौकिकता= cosmic
    अलौकिकता=otherworldly,
    मन्तव्य=intent
    रक्त संचरण=blood circulation
    मूर्त्त= tangible
    अमूर्त्त अनुप्रयोग= abstract application
    संचार व प्रसार=communication and circulation
    उपसर्ग= suffix
    तत्परता=readiness
    प्रत्यय=prefix
    सद्गति=salvation
    मोक्ष प्राप्ति=attainment of salvation

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