पंखुरी सिन्हा की कहानियों ने इक्कीसवीं शताब्दी के पहले दशक में आलोचकों-पाठकों सभी को प्रभावित किया था। वह कविताएँ…
लालची हूहू की कहानी: मृणाल पाण्डे
प्रसिद्ध लेखिका मृणाल पाण्डे आजकल एक सीरीज़ लिख रही हैं ‘बच्चों को न सुनाने लायक बाल कथा’, जिसमें पारम्परिक बोध…
वर्तमान में लोकप्रिय साहित्य का कोई मुकाम नहीं हैं: सुरेन्द्र मोहन पाठक
हिंदी के जाने माने लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक ने यह लेख लिखा है। 60 साल की लेखन यात्रा के…
‘न हन्यते’ और ‘बंगाल नाइट्स’: एक शरीर दो आत्मा
मैत्रेयी देवी के उपन्यास ‘न हन्यते’ और मीरचा इल्याडे के उपन्यास ‘बंगाल नाइट्स’ के बारे में एक बार राजेंद्र…
अमेरिकी ब्लैक कवि जेरिको ब्राउन की कुछ कविताएँ
जेरिको ब्राउन अमेरिका के ब्लैक कवि हैं और समकालीन अमेरिकी कविता का एक महत्वपूर्ण नाम हैं। इस साल उनको अपने…
वीरेन्द्र प्रसाद की कुछ कविताएँ व गीत
भा.प्र.से. से जुड़े डॉ. वीरेन्द्र प्रसाद अर्थशास्त्र एवं वित्तीय प्रबंधन में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। वे पशु चिकित्सा विज्ञान…
आईनासाज़:परछाइयां और आहटें पकड़ने का अजब खेल
अनामिका के उपन्यास ‘आईनासाज़’ की कथा को लेकर बहुत लिखा गया है लेकिन उसके विजन को लेकर बात कम…
सुश्री आशकारा ख़ानम ‘कश्फ़’ की ग़ज़लें
प्रख्यात कवयित्री और शिक्षाविद् सुश्री आशकारा ख़ानम ‘कश्फ़’ दिल्ली में रहती हैं। वह उनके पति, श्री सुहैब फारूकी (दिल्ली पुलिस…
कथाकार कमलेश्वर : दुष्यन्त कुमार की दृष्टि से
पहले लेखक एक दूसरे के ऊपर खुलकर लिखते थे फिर भी दोस्तियाँ क़ायम रहती थीं। प्रसिद्ध शायर दुष्यंत कुमार ने…
’90s किड’ की निगाह में बासु चटर्जी का सिनेमा
बासु चटर्जी की फ़िल्मों को आज का युवा वर्ग किस तरह देखता है। 90 के दशक में जन्मा, पला-बढ़ा वर्ग।…



