बच्चों को न सुनाने लायक बालकथा -3 प्रसिद्ध लेखिका मृणाल पांडे अपने लेखन में निरंतर प्रयोग करती रहती हैं। हाल…
कविता शुक्रवार: कुमार अम्बुज की नई कविताएँ
पाठकों का अभिनन्दन – – – – – – – – – – – – – – – जैसा कि…
‘काजल लगाना भूलना’ का मर्म
व्योमेश शुक्ल समकालीन हिंदी कविता का जाना पहचाना नाम है। हाल में उनका कविता संग्रह प्रकाशित हुआ है ‘काजल…
निवेदिता की कहानी ‘जड़ें बुलाती हैं!’
निवेदिता जी लेखिका, हैं कवयित्री हैं और समर्पित ऐक्टिविस्ट हैं। उनकी इस कहानी में समकालीन संदर्भों में विस्थापन के दर्द…
फिल्में ही सब कुछ नहीं थीं सुशांत सिंह राजपूत के लिए
प्रज्ञा मिश्रा यूके में रहती हैं। वहाँ लॉकडाउन के अनुभवों को कई बार लिख चुकी हैं। इस बार उन्होंने अभिनेता…
स्पीति में बारिश-कृष्णनाथ को पढ़ते हुए
कृष्णनाथ के यात्रा वृत्तांतों का अलग महत्व रहा है। उनके यात्रा-वृत्त ‘स्पीति में बारिश’ को पढ़ते हुए यतीश कुमार…
प्रदीपिका सारस्वत की कहानी ‘मैं सुंदरता से प्रेम करती हूँ’
प्रदीपिका सारस्वत बहुत अलग तरह का गद्य लिखती हैं। जीवन के अनुभव, सोच सब एकमेक करती हुई वह कुछ…
‘मम्मी शिमला गई थीं ‘महाभोज’ लिखने के लिए’- रचना यादव
यह एक पुरानी बातचीत है रचना यादव से।संगीता ने रचनाजी से यह बातचीत वेबपत्रिका लिटरेट वर्ल्ट के लिए अगस्त 2003 में…
अखोनी- दिल्ली में पूर्वोत्तर की गाढ़ी खुशबू वाली फिल्म
12 जनवरी को नेटफ़्लिक्स पर एक फ़िल्म रिलीज हुई ‘अखोनी’। यह फ़िल्म एक संवेदनशील और अछूते विषय पर है, पूर्वोत्तर…
घासलेटी आंदोलन : ‘अबलाओं का इन्साफ’ और अश्लीलता
‘अबलाओं का इंसाफ़’ शीर्षक से एक किताब चाँद कार्यालय से 1927 में प्रकाशित हुआ था। क्या वह किसी पुरुष का…



