लोकप्रियता को कलात्मक-वैचारिक स्तर का पैमाना नहीं बनाया जा सकता

एक ज़माने में जिसको लुगदी साहित्य कहा जाता था आज वह लोकप्रिय साहित्य कहा जाता है। उसकी परम्परा पर वरिष्ठ…

पराग मांदले की कहानी ‘चाह की गति न्यारी’ उपसना झा की टिप्पणी के साथ

‘नया ज्ञानोदय’ के अगस्त अंक में प्रकाशित पराग मांदले की कहानी ‘चाह की गति न्यारी’ पढ़िए युवा कवयित्री-लेखिका उपासना झा की…

ईशान त्रिवेदी की कहानी ‘स्टील का बिल्ला’

एनएसडी के ग्रेजुएट, फ़िल्मों-टीवी की दुनिया के वरिष्ठ पेशेवर ईशान त्रिवेदी के छोटे छोटे क़िस्सों का मेरे ऊपर ग़ज़ब जादू…

आज़ादी को ज्यादातर लोग पाप समझते हैं.  

पूनम दुबे को  पढ़ते हुए कई बार लगता है कि वह यात्राओं पर लिखने के लिए ही बनी हैं। इस…

रूसी लेखक सिर्गेइ नोसव की कहानी ‘फ्रीज़र’

रूसी लेखक सिर्गेइ नोसव की कहानी का अनुवाद किया है आ. चारुमति रामदास ने- =============== आख़िरकार रात के दो बजे…

‘पॉपुलर की हवा’ और ‘साहित्यिक कहलाए जाने की ज़िद’ के बीच हिंदी लेखन

राजकमल प्रकाशन समूह के संपादकीय निदेशक सत्यानंद निरुपम निस्सन्देह इस समय हिंदी के ऐसे चुनिंदा संपादक हैं जो हिंदी के…

ज्ञान और संवेदना के संतुलन का उपन्यास

पंकज सुबीर के उपन्यास ‘जिन्हें जुर्म–ए–इश्क़ पे नाज़ था’ की आजकल बहुत चर्चा है। इसकी समीक्षा पढ़िए। वीरेंद्र जैन ने…

सीमा मेहरोत्रा की पाँच कविताएँ

सीमा मेहरोत्रा ने बीएचयू से अंग्रेज़ी में एमए करने के बाद अमेरिका के शिकागो शहर में रहकर पढ़ाई की। आजकल…

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Jankipul : A Bridge of World's Literature एक नयी शुरुआत! मेरा कॉलम #Jankipul के लिए " जनहित में जारी सब पर भारी" आपकी टिप्पणी की अपेक्षा रहेगी