जब चेतन भगत को पढने से परहेज नहीं तो पढ़ाने से क्यों?

‘हर तरफ ऐतराज होता है मैं अगर रौशनी में आता हूँ- लगता है दुष्यंत कुमार ने यह शेर चेतन भगत…

सवाल सीता की मुक्ति का नहीं सीता से मुक्ति का है?

23 अप्रैल को दिल्ली के मुक्तांगन में ‘एक थी सीता’ विषय पर बहुत अच्छी चर्चा हुई. उसकी एक ईमानदार रपट…

नई नस्ल जौन एलिया को पढ़ती है और उनकी तरह दीवाना हो जाना चाहती है

जौन एलिया उर्दू शायरी का एक बड़ा करिश्मा हैं. न तो उनके पीछे किसी विचारधारा, किसी सियासत की ताकत थी,…

ये कैसा मुल्क है लोगों जहाँ पर जान सस्ती है

दिल्ली में किसान नंगे हो रहे हैं. यह अवाक कर देने वाली स्थिति है. किसान बचेंगे या नहीं, किसानी बचेगी…

महिलाएं और पॉर्न बनाम ज़बरदस्ती की शर्म

कुछ टॉपिक्स ऐसे होते हैं, जिन पर बहस कभी ख़त्म नहीं होती। जैसे कि भाषा, फ़ेमिनिज़्म, पॉर्न, फ़्रीडम, नेशन, वग़ैरह।…

विद्या बालन के नाम एक ‘मामूली’ दर्शक का ग़ैर मामूली ख़त

डियर विद्या, मैं हिंदी सिनेमा का एक बेहद मामूली दर्जे का दर्शक हूँ. बहुत दिनों से ये खत में मन…

‘छोटी-छोटी गौवें, छोटे-छोटे ग्वाल, छोटे से हमरे मदन गोपाल’

राकेश तिवारी का उपन्यास आया है ‘फसक‘. कुमाऊँनी में फसक का मतलब गप्प होता है. हजारी प्रसाद द्विवेदी गल्प यानी…

युवा शायर #8 मुदिता रस्तोगी की ग़ज़लें

युवा शायर सीरीज में आज पेश है मुदिता रस्तोगी की ग़ज़लें – त्रिपुरारि ग़ज़ल-1 सुनो एक बात थी जो तुमसे…

अनघ शर्मा की कहानी ‘शाहबलूत का पत्ता’

अनघ शर्मा सात साल से कहानियाँ लिख रहे हैं। उनकी कहानियों के नाम किसी कविता सरीखे हैं जो कहानी पढ़ने…

जानकी पुल को सहयोग करें

Jankipul : A Bridge of World's Literature एक नयी शुरुआत! मेरा कॉलम #Jankipul के लिए " जनहित में जारी सब पर भारी" आपकी टिप्पणी की अपेक्षा रहेगी