संस्कृत के जाने-माने विद्वान राधावल्लभ त्रिपाठी के संपादन में वात्स्यायन के ‘कामसूत्र’का नया संस्करण वाणी प्रकाशन से प्रकाशित हो रहा…
एकदम खाली है राहुल गांधी की बंडी की जेब
युवा-कवि उमाशंकर चौधरी की कविताओं का एक अपना राजनीतिक मुहावरा है, जो उन्हें समकालीन कवियों में सबसे अलगाता है.…
एकदम खाली है राहुल गांधी की बंडी की जेब
युवा-कवि उमाशंकर चौधरी की कविताओं का एक अपना राजनीतिक मुहावरा है, जो उन्हें समकालीन कवियों में सबसे अलगाता है.…
फिराक गोरखपुरी की एक दुर्लभ कहानी \’दही का बर्तन\’
आज उर्दू के मशहूर शायर फिराक गोरखपुरी का जन्मदिन है. उनके गज़लों, नज्मों, कतओं से तो हम सब बखूबी परिचित रहे…
फिराक गोरखपुरी की एक दुर्लभ कहानी ‘दही का बर्तन’
आज उर्दू के मशहूर शायर फिराक गोरखपुरी का जन्मदिन है. उनके गज़लों, नज्मों, कतओं से तो हम सब बखूबी परिचित रहे…
हिन्दी कविता के दो दशक– चेहरे, मुखौटे और चश्मे
समकालीन कविता क्या अपने समय-समाज का रूपक है? क्या समकालीन कवि आधुनिक हिंदी कविता की छायाओं से मुक्त हो…
हर गाँव शहर अब गूँज उठे जनगणमन के स्वर से
प्रसिद्ध कवि सुशील सिद्धार्थ के दो जनगीत आज प्रस्तुत हैं, भ्रष्टाचार के खिलाफ हो रहे, जन-लोकपाल के लिए हो रहे…
पर्वत पर्वत धारा फूटे लोहा मोम सा गले रे साथी
गोरख पांडे क्रांति के कवि थे. आज जनांदोलन के इस दौर में उनकी कुछ कविताएँ ध्यान आईं. आप भी पढ़िए-…
पर्वत पर्वत धारा फूटे लोहा मोम सा गले रे साथी
गोरख पांडे क्रांति के कवि थे. आज जनांदोलन के इस दौर में उनकी कुछ कविताएँ ध्यान आईं. आप भी पढ़िए-…
ज़माने भर को को है उम्मीद उसी से
आज ज़हीर रह्मती की ग़ज़लें. वे नए दौर के संजीदा शायर हैं. ‘कुछ गमे-जानां, कुछ गमे दौरां’ के शायर. अपने…



