यूनिस डिसूज़ा की पाँच अनूदित कविताएँ

आज पढ़िए अंग्रेज़ी भाषा की कवयित्री यूनिस डिसूज़ा की कविताएँ जिनका अनुवाद किया है जाने-माने युवा लेखक किंशुक गुप्ता ने। पढ़िए पाँच कविताएँ- मॉडरेटर
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1

स्त्रियों के लिए सलाह

बिल्लियाँ पालो
यदि तुम जानना चाहती हो
प्रेमियों की तटस्थता
तटस्थता हमेशा तिरस्कार नहीं होती—
बिल्लियाँ अपनी लिटर ट्रे में लौटती हैं
जब उनको ज़रूरत होती है.
खिड़की पर खड़े होकर
उनके प्रेमियों को गाली मत दो.
उनकी बड़ी, हरी आँखों में
व्याप्त सतत आश्चर्य
तुम्हें अकेले मरना
सिखा देगा

2
वृद्धाश्रम, सिडनी

जब वो दुनिया में आए तब पत्थर की तरह ठंडे थे.
उनके चेहरे काली बारिश से पटे पड़े थे.
उन्हें किसी ने नहीं बुलाया.
उनका कोई इतिहास नहीं था.
दुख से चिह्नित
कहानी से ज्यादा रौंगटे खड़े करने वाली
रही उनकी जिंदगी.
सूरज डूबता है, उगता है.
डूबता है, उगता है.

3

मैं एक पिता चाहती हूँ

मैं एक पिता चाहती हूँ
हमेशा से चाहती रही हूँ
पर ईश्वर मानता नहीं.
वो ज़्यादा ही फैसला-कुन है.
और इसलिए मुझे तुम मिल गए—
मेरे पिता की तरह
अनुपस्थित.

4
तारे देखना

जो कौंध मैंने तुमने देखी
—प्रेम—
वह मृत तारे से आ रही थी.
इसमें केवल मेरा ही दोष है
मेरी उम्र में तारे देखना
एक संदिग्ध कला है.

5
इन कविताओं में मेरा जीवन मत खोजना

कविताओं में हो सकता है संतुलन, समझदारी
और मलबे से कलावादी दूरी
जो भी मैंने दर्द से सीखा
मैं हमेशा जानती थी
पर कभी अपना नहीं सकी.

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