दूर देश के परिंदे: उजड़ने और बसने के बीच की करुणा का कथानक

अनामिका का उपन्यास ‘दूर देश के परिंदे’ जैसे आजादी के आसपास के भारत में चलने वाले विमर्शों की कथा है।…

आईनासाज़: संवादधर्मिता और सूफ़ीवाद का आख्यान

प्रसिद्ध लेखिका अनामिका के उपन्यास ‘आईनासाज़’ पर यह टिप्पणी लिखी है युवा लेखक महेश कुमार ने। अनामिका के उपन्यासों में…

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