अरुंधति रे की किताब प्रभात सिंह के अनुवाद में ‘मेरी माँ, मेरी गैंगस्टर’ जब से प्रकाशित हुई है लगातार चर्चा…
Tag: प्रशांत कुमार मिश्र
‘विचार और वजूद’ लोक की जड़ों में रोपी गई जमीन की हकीकत
प्रसिद्ध लेखिका नूर ज़हीर के 2008 में प्रकाशित उपन्यास ‘बड़ उरैये’ के बहाने वैचारिकता के संघर्ष पर यह टिप्पणी लिखी…



