मेरी माँ, मेरी गैंगस्टर: निजी इतिहास में छिपा सामाजिक इतिहासAugust 17, 2026August 17, 20261 mins0अरुंधति रे की किताब प्रभात सिंह के अनुवाद में ‘मेरी माँ, मेरी गैंगस्टर’ जब से प्रकाशित हुई…समीक्षा prabhatcontinue Reading..
‘विचार और वजूद’ लोक की जड़ों में रोपी गई जमीन की हकीकतJune 15, 20261 mins0प्रसिद्ध लेखिका नूर ज़हीर के 2008 में प्रकाशित उपन्यास ‘बड़ उरैये’ के बहाने वैचारिकता के संघर्ष पर…समीक्षा prabhatcontinue Reading..