Posted in ब्लॉग का खाएँ का पिएँ का ले परदेस जाएँ Estimated read time 1 min read Posted on October 9, 2012 by प्रसिद्ध आलोचक-अनुवादक गोपाल प्रधान ने यह लोक कथा भेजते हुए याद दिलाया की आज के सन्दर्भ में इसका पाठ कितना…