Posted in ब्लॉग कहानी हीर-रांझा की पुरानी थी, पुरानी है Estimated read time 1 min read Posted on April 6, 2012 by हिंदी गज़लों का अपना मिजाज रहा है, उसकी अपनी रंगों-बू है और उसकी अपनी ‘रेंज’ भी है. वह जिंदगी के…