पेंगुइन से संपर्क हुआ तो मेरे पंख कुछ और खुल गए- नरेन्द्र कोहली

हिंदी के वरिष्ठ लेखक नरेन्द्र कोहली की दो किताबें जनवरी में पेंगुइन रैंडम हाउस-हिन्द पॉकेट बुक्स से प्रकाशित होने वाली है. इसकी घोषणा हाल में ही हुई- मॉडरेटर

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हिंदी में मिथक कथाओं पर आधारित उपन्यासों के पर्याय माने जाने वाले नरेन्द्र कोहली की दो नई पुस्तकें पेंगुइन रैंडम हाउस के तहत हिन्द पॉकेट बुक्स से जनवरी 2019 में प्रकाशित होने वाली हैं. पद्मश्री प्राप्त इस लेखक का लेखन किसी परिचय का मोहताज नहीं है. 1975 में रामकथा को समकालीन सन्दर्भों में लिखकर कोहली जी ने जो ख्याति हासिल की समय के साथ वह बढती गई है. 44 साल बाद भी उनके लेखन का कोई सानी नहीं. उन्होंने विवेकानंद के जीवन-कर्म पर भी उपन्यास लिखा है. एक तरह से वे अपनी परम्परा का आरम्भ भी हैं और अंत भी.

इस अवसर पर श्री नरेन्द्र कोहली ने कहा, ‘पेंगुइन से सम्पर्क हुआ तो लगा कि मेरे साहित्य के आकाश पर जो नीले मेघ थे उनमें इन्द्रधनुष भी उग आया है. मेरे पंख कुछ और खुल गए हैं. मेरा आकाश कुछ और फैलकर विस्तृत हो गया है. मेरी गंगा अब गंगासागर में जा मिली है.’

हिन्द पॉकेट बुक्स की एडिटर इन चीफ वैशाली माथुर ने कहा, ‘श्री नरेन्द्र कोहली जैसी सर्जक प्रतिभाओं के साथ काम करने का यह हमारे लिए महान अवसर है. उनकी कृतियों ने हिंदी साहित्य को नयापन दिया है और मुझे उनके लेखन को नए पाठकों तक पहुंचाने के इस अवसर पर गर्व है.’

पेंगुइन रैंडम हाउस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट नंदन झा ने कहा, ‘स्तरीय पुस्तकों तथा उपन्यासों को पेश करते हुए हिंदी साहित्य जगत को सुदृढ़ बनाना बेहद जरूरी है. समकालीन हिंदी साहित्य को नए सिरे से और मजबूती के साथ पेश करने से पाठकों की एक पूरी पीढ़ी लाभान्वित होगी और उन लेखकों को भी फायदा मिलेगा जिनके योगदान ने हिंदी साहित्य को लगातार समृद्ध बनाया है.’

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