एडुवर्ड हेरेन्ट की की कविताएँ

एडुवर्ड हेरेन्ट की की कविताओं का अनुवाद किया है युवा कवयित्री अनामिका अनु ने–
=====
 
आर्मेनिया
 
१.
***
वाॅन गाॅ ने अपने कानों से मुक्ति पा ली
क्योंकि उसे इसकी जरूरत नहीं थी
वह असाधारण लोगों को पहले ही
सुन चुका था
 
अल-मैरी वास्तव में इतना ज्यादा देख सकता था
कि उसकी आँखें
अब और अधिक महत्व नहीं रखती थी
 
चाॅरेन्ट का कोई क़ब्र नहीं था
क्योंकि
वह अब तक मरा नहीं था
 
मैं लोगों का अभिवादन बायें हाथ से करता हूँ
क्योंकि
दाहिने हाथ से मैं पहले ही
प्रभु की इबादत कर चुका हूँ
 
 
2.ग्यारहवां आदेश
 
जब आप प्रेम को अपने हाथ से जाने देते हैं
तब अपनी आत्मा की कमजोरियों
के लिए ताली बजाएं
 
 
3.
मैं जानता हूँ
किसी दिन
मैं उस रहस्यपूर्ण
रात्रिभोजन से उठ जाऊँगा
अपने पिता के
क्षत विक्षत पदचिन्हों
को पहन और
अपनी छोटी सी जेब को
अपरिमित प्रेम से भर…
मैं सोचता हूँ क्या मेरे दिन
इतने अधिक असहनीय प्रकाश को माप सकेंगी
 
4.
मैं कवि हूँ
और गरीब
मैं देवपरियों की देखभाल करता हूँ
 
5.मैरी मैगडालीन
 
वापस दो वे पत्थर जो
मैंने तुम पर फेंके थें
मेरे घर में कई खाली सुराख़ हैं
 
6.
जीवन मुझे मेरे सारे विवरणों
के साथ जी रही है
मैं उसके चारों तरफ घूम रहा हूँ
जैसे ब्रश रंग में।
 
तेरे कैनवास में
जापानी सिक्कों की तरह छिद्र है
उनसे लगातार बाहर की ओर
एक-एक करके मुक्त
होता मेरा प्रेम।
उनकी विदाई
मेरे आश्चर्यजनक क्षति है।
 
मेरी बजती तालियां
पहले से और अधिक भारी हो गयी हैं
इसलिए मैंने उन्हें हाथों में संग्रहित कर रखा है
जैसे मुड़े कागज का नोट
जो अंत यानि मृत्यु के लिए रखा गया हो
 
ताकि मुखौटे का पुनर्निर्माण हो सके
उसमें भी छिद्र हो जाएगा
वैसे ही जैसे कैनवास में हैं
मैं हमेशा के लिए बजता रहूँगा
और ज़िन्दगी मुझे सारे विवरणों
के साथ जिएं जाएगी।
 
 
7.
चिड़िया पिंजरे के चारों तरफ बेचैन चहलक़दमी
कर रही है
यहां उसने आज़ादी का स्वप्न छोड़ा था
8.
 
मैंने अपनी अनुपस्थिति के
हर स्थान पर तुमसे अपनी झिझक को बो दिया है
फिर भी किसने मेरे शब्दों के सुगंध
को छलनी/तार तार कर दिया है
मुकम्मल ख़रोंचें हैं मेरे माथे के चौकस सपनों के भीतर,
अगर तुम्हारी चाह मेरे रक्त को अनुदित करने की है
तो मेरी कविताओं से जाॅब के पत्थर संकलित करो
वे तुम्हारे बेटों की अप्रत्यक्ष पीड़ाओं की रहस्यमय कोशिकाएं हैं
 
 
 
9.
आँसू की प्रभु में सबसे अधिक आस्था है
यह प्रायः उम्मीद के चर्च का दौरा करती है
 
10.
हम ने कविता खायी है
तब धुंध चुप्पी के साथ एक कप काॅफी भी थी
मृत्यु से दूर
रंगों को चूसते
और शब्दों पर लगाए टकटकी
 
11.
मैं मौन की पपनी एक एक करके
तोड़ रहा हूँ
अपनी प्रार्थनाओं की मरम्मत करने के लिए
जो शब्दों के सूक्ष्मभावान्तर से फट गयी थीं
अब ये सूक्ष्म अंतर ध्वनि से भी अधिक प्रबल…..
 
अब मैं उम्मीद के चर्च में नंगे पाँव घुसा
मेरे भविष्य के आवाजों को मेरे पदचिन्ह रंग न दे
जबकि मेरे पदचिन्ह
मेरी प्रेम वंदना है
जो कभी खत्म नहीं होगी
क्योंकि इसने खुद को कभी रंगा नहीं
और अब प्रधान रंग उभरा है
ये प्रेम अनुभूतियों की कविता हैं
कवित्व शक्तियां स्त्री में तब्दील नहीं होती
 
 
 
 
 
 
 
 

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