आज रवीन्द्र रुक्मिणी पंढरीनाथ की कुछ कविताएँ प्रस्तुत हैं। इन कविताओं का मराठी से हिन्दी अनुवाद उन्होंने स्वयं किया है –अनुरंजनी
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1. मुक्ति
नन्हे राहुल को सिद्धार्थ के हाथ सौंप कर
मुंह अँधेरे यशोधरा घर से निकली
मुक्ति की तलाश में
तब उसे विदा करने कपिल वस्तु की सीमा तक
आए उस के वृद्ध सास ससुर.
बोले –
आँख भरकर देख लो यह मंजर
और कर दो उसे समर्पित स्मृतियों की कभी न लौटने वाली लहरों को
अगर कभी लौटो इस राह पर, तो
बदली होगी –
यह राह
यह सृष्टि
और तुम खुद.
हम शायद तब तक नहीं रहेंगे
राहुल का लालन पालन और राज नीति के झमेले में भी
साक्षी भाव जागृत रखना सीख पाया
तो सिद्धार्थ भी ढूँढ लेगा अपनी मुक्ति की राह
इस के आगे की राह, जो कुछ भी होगी-
काँटों भरी, भूलभुलैया की, खाई में छलांग लगाती
या नीरवता की
तुम्हारी अकेली की होगी, ध्यान रहे!
शुभास्ते पंथानः सन्तु !
2. शादी
कुबेर की बेटी
रंभा-उर्वशी-मेनका-तिलोत्तमा
चूरमे के लड्डू से लेकर मेक्सिकन क्युझीन तक सब कुछ बना सकनेवाली अन्नपूर्णा
बच्चों का भरण पोषण करने वाली जगन्माता
दफ्तर-घर-सोशल सर्कल-रिश्तेदार सब कुछ सम्हालने वाली दश भुजा
तुम में छिपे देवदास को समर्पित चंद्र मुखी
एक ही जनम में एक ही समय कितनी औरतों से शादी
करना चाहते हो तुम?
3. नारीवाद: कुछ अनबुझे सवाल
श्रवण कुमार शर्मा को अगर मिलता है ग्रीन कार्ड
तो क्या उस की माँ जायेगी फिलाडेल्फिया
बादाम के लड्डू लेकर बहु की डिलीवरी कराने
नहलाएगी, खिलाएगी अमरीकन पोते को
और करेगी पेश गरम काफी का प्याला
दफ्तर से लौटी थकी-मॉंदी बहु के लिए?
या चबाती रहेगी लम्बे-चौड़े एल ई डी स्क्रीन पर
वगार दिया सीरियल्स का बासी चावल?
***
एनाराय राम सिंह ठाकुर ने अपनी पत्नी
सीता शर्मा से विवाहोपरान्त दुर्व्यवहार करने का
दफा ४९८-ए का मुकद्दमा जब आएगा
न्याय मूर्ती पासवान के न्यायालय में
तब सरकारी वकील लक्ष्मण राठोड
और आरोपी की वकील उर्मिला यादव
इन के मुक़ाबले का
कास्ट-जेन्डर डायनॅमिक्स क्या होगा?
***
१७ साल ३६४ दिन उम्र के आरोपी ने
७१ साल की नन पर किया बलात्कार
लेकिन जज महोदय को अगर हो विश्वास
उस के शुद्ध धार्मिक संस्कारों पर
तो भारतीय दंड विधान के अनुसार क्या होगा उस का भविष्य?
सिमॉन द बोव्हा, जर्मेन ग्रीअर और मार्गारेट मीड पढ़ कर भी
अनुत्तरीत रहे ये कुछ जेन्डर विषयक सवाल …
4. यात्रा
ग्यारह बच्चों को जन्म देते-देते
पर नानी उकता गयी
माहवारी के दिनों में रोते बच्चे को छू लिया, इसलिए
नानी ने सहे जलती सिगरेट के दाग
रोज बदन को बेतहाशा मांज कर भी छूटे नहीं
माँ के कामकाजी शरीर पर चिपके भीड़ के घिनौने स्पर्श
आज मैं बुरके में रहूँ या सप्त पाताल में
एक्स रे लगाये उन के कैमरे बिंधते हैं मेरे हर अंग को
या मेरे चेहरे पर कलम कर किसी का नंगा बदन
वे करते हैं मुझे नीलाम असंख्य अनामिक ग्राहकों की भीड़ में
ऊपर से मुझे ही दी जाती है हिदायत अपना मादापन संवर कर इस्तेमाल करने की
शरीर की लज्जा से लेकर शरीर ही अस्तित्व तक की यह यात्रा
कब ले जाएगी शरीर के पार सभी औरतों –
और मर्दों को?
5. मुक्ती का रास
चमचमाते नक्षत्र गेसुओं में गूँथ कर
और आकाशगंगा की मेखला कमर पर सजा कर
अमावस की रात मैं क्षितिज पर अवतीर्ण हुई
और
भूमि की ओर आँखे गाड़, आस लगाये बैठा अपराध ग्रस्त राम
यज्ञकुंड के पास ठिठका विकल शिव
अपने दुखते पाँव सिमट कर शेष पर फैला आराम भोगी विष्णु
भिक्षा पात्र आगे करनेवाला भूखा-प्यासा बुद्ध
इन सब को लांघ कर
पृथ्वी की तरफ़ पीठ फेर
महासागर में मैंने रचा मुक्ति का रास
सारी जल देवता, वन देवता, यक्षिणी, तथा भिल सहेलियों के संग
6. गर्मी की छुट्टी
फिजां में घुली पकी धूप की खुशबू
छाँव पकड़कर लेटे कुत्ते बिल्लियाँ
मांएं मौसियाँ चाचियाँ गप्पे लड़ाते-लड़ाते ऊँघती हुई
मुंगोडे पापड़ धापोड़े हमारे इन्तज़ार में छत पर औंधे पड़े हुए
हर शाख से मुनिया आम और इमलियाँ इशारे करती हुई
और हम गैंगस्टर मोर्चा थामे हुए गली की नुक्कड़ पर
लड़के सारे दब्बू, हम लड़कियों से सहमे
लंगड़ी कर साईकिल सीखना, गिरना, घुटने कोहनियाँ तोड़ लेना
लिडो, सांप सीढी, कैरम, गड्डी झब्बू, अष्टचंगप्पो
कभी ख़त्म न होने वाली अन्त्याक्षरी, एक दूजे की टांग खिचाई
घर से भाग जाने की सामूहिक योजनाएं
‘खाऊ’ से ठूंसी जेबें खाली होने तक ही टिकने वाले
कितने जल्द ख़त्म हो जाती हैं ये गर्मी की छुट्टियाँ
वसंत के आगमन से पहले वाले वसंत की…
7. लक्ष्य वेध
ऐसे कैसे निशाना साधकर लक्ष्य बिंध सकते हो तुम लोग?
तुम्हारा लक्ष्य एक मात्र, सारी संवेदनाएं एकाग्र
सारा इकहरा अस्तित्व केन्द्रित धनुष की प्रत्यंचा में
नज़र के दायरे में सिर्फ और सिर्फ पंछी की आँख
सफलता, करियर, अलादीन का खज़ाना, मुक्ति, खूबसूरत लड़की
या सिर्फ उसकी योनी …
नहीं लुभाता तुम्हें दरख्त का सब्ज शृंगार, पंछी के गले से निकलने वाला गांधार
वह मादा पंछी पेट से है यह समझने पर
ढीली नहीं पड़ती तुम्हारी प्रत्यंचा, चूकता नहीं तुम्हारा निशाना
हिमालय की ओर चल पड़ते हैं तुम्हारे कदम, तब
नहीं रोक पाती उन्हें पानी की धारा
गाँव की नदी हो या बीबी बच्चों का अश्रुपात
और योनी तो आखिर जीतकर हासिल करने की चीज़ है तुम्हारे लिए
उस के नि:श्वास सुनने के इंद्रिय हैं तुम्हारे पास ?
मुझे नहीं बिंधना कोई लक्ष्य
नहीं बनना मुझे कामयाब, अमीर, नामचीन या पुरुष जेत्री
मैं नकारती हूँ तुम्हारा प्रशिक्षण संवेदनाएं सुन्न करने का
नकारती हूँ डिल्डो, गिगोलो और गोरे पन की गारंटी देनेवाले क्रीम भी
मुझे नहीं बनना शिकारी, शिकार या कुछ भी
मुझे नहीं बनना तुम जैसा – दाढ़ी मूँछों के साथ या उनके बगैर
आदिमाता के आदिम रंगों में रंगी हूँ मैं
ज्ञान वृक्ष के सारे फल तुम्हें ही निसार हो !

