
रज़ा जन्मशती के अवसर पर “रज़ा युवा -2022” का आयोजन मण्डला में हुआ। जिसकी रपट लिखी है कवयित्री स्मिता सिन्हा ने-
—————————— —————————— —
पिछले दिनों रजा फाउंडेशन और कृष्णा सोबती शिवनाथ निधि द्वारा “रज़ा युवा-2022” का वृहद आयोजन किया गया। 11 और 12 नवंबर 2022 को संपन्न इस आयोजन के विशिष्ट बात यह रही कि देश की राजधानी से दूर सैयद हैदर रज़ा की जन्मभूमि मण्डला ( मध्य प्रदेश) पर रज़ा साहब के जन्मशती वर्ष को ध्यान में रखते हुए यह आयोजन किया गया।
हिन्दीतर भाषाओं के मूर्धन्य कवि शंकर घोष, हरभजन सिंह, अख्तर उल इमान, अय्यप्पा पनिक्कर, रमाकांत रथ और अरुण कोलटकर पर एकाग्र इस दो दिवसीय उत्सव में देश भर के 27 शहरों से लगभग 40 साहित्यकार शामिल हुए।
समारोह के शुरुआत से पहले रज़ा साहब और उनके पिता के क़ब्र पर पहुंच कर सभी ने पुष्पांजलि अर्पित की।
मण्डला के झंकार सभागार में “युवा 2022” के पहले दिन के पहले सत्र में बांग्ला भाषा के कवि संख घोष पर जोशना बनर्जी आडवाणी, पूनम अरोड़ा, उत्कर्ष ऐश्वर्या, विशाल विक्रम सिंह, सुदीप सोहनी और सौरभ राय ने एकाग्र प्रस्तुत किया। दूसरे सत्र में पंजाबी भाषा के कवि हरभजन सिंह पर बाबुषा कोहली, अदनान कफील दरवेश, अरुणाभ सौरभ, विहाग वैभव, शुभम मोंगा और कुमार मंगलम ने अपनी बातें रखें। तीसरे सत्र में उर्दू के कवि अख्तर उल ईमान पर रश्मि भारद्वाज, ज्योति शर्मा, राहुल सिंह, अर्पण कुमार और आनंद गुप्ता ने अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया।
उस्ताद महमूद फारुकी की “दास्तान ए रज़ा” की खूबसूरत व बेमिसाल प्रस्तुति के साथ एक बेहद सार्थक और समृद्ध दिन का समापन हुआ।
युवा के दूसरे दिन चौथे सत्र में मलयालम के कवि अय्यप्पा पणिक्कर पर अनामिका अनु, मयंक और योगेश प्रताप शेखर ने अपनी बातें रखीं। पांचवां सत्र उड़िया के कवि रमाकांत रथ पर था जिस पर लवली गोस्वामी, अणुशक्ति सिंह, नताशा, शंकरानंद और जगन्नाथ दुबे ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के छठवें व अंतिम सत्र में पूनम वासम, अम्बर पांडे, स्मिता सिन्हा, वीरू सोनकर और कुमार सुशांत ने मराठी कवि अरुण कोलटकर पर अपना एकाग्र प्रस्तुत किया|
दोनों ही दिन सत्रों के अंत में पर्यवेक्षकों ने हर प्रतिभागी के वक्तव्य को ध्यान में रखते हुए सुचिंतित विचार रखे | वरिष्ठ कवि अरुण कमल, असंगघोष, कहानीकार आनंद हर्षुल, कथाकार पत्रकार प्रियदर्शन और संपादक नरेंद्र पुंडरीक ने एकाग्र के विषयवस्तु और संबद्ध तर्कों पर अपना दृष्टिकोण स्पष्ट किया | रचनाकाल और तात्कालिक परिवेश के मद्देनज़र कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर चर्चा की |
आयोजन का समापन करते हुए रजा फाउंडेशन के प्रबंध न्यासी अशोक वाजपेयी जी ने कहा कि इस बार युवा तीन अर्थ में ऐतिहासिक है| पहले अर्थ में, पहली बार हिंदी को अखिल भारतीय स्वरूप देने की कोशिश हुई | दूसरे, हिन्दी के युवाओं ने पहली बार गैर हिन्दी कवियों पर व्यवस्थित रुप से विचार किया और तीसरे, रज़ा साहब के जन्मशती के अवसर पर उनके जन्म स्थान मण्डला में संपन्न हुआ। अशोक जी ने युवाओं को अपनी आलोचना को और बेहतर और पारदर्शी बनाने के सुझाव भी दिए और आलोचना में उनकी की गयी गलतियों को भी बड़ी मुखरता से इंगित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी एक बुनियादी भाव को लेकर महान रचना लिखी जा सकती है।अपनी रचनाधर्मिता के साथ हमें अपनी नागरिक भूमिका को भी निबाहना आना चाहिए। व्यापक मनुष्यता और वह अनुराग के बरअक्स भाषा में संवेदनशीलता और साहित्य में नवाचार को बचाए रखने की कोशिश होती रहनी चाहिए।
इस दो दिवसीय युवा आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि यही रही कि सभी प्रतिभागियों ने इसे रचनात्मकता और सृजनात्मकता समृद्द व विकसित करने वाला आयोजन माना। खुले दिल से स्वीकारा की दबाव में ही सही हमने अपनी भाषा से अलग दूसरी भाषाओं के कवियों को पढ़ा, जाना और समझा। और अंततः यह दबाव रुचि व जिज्ञासा में परिणत हो गई। समकालीन हिन्दी साहित्य के आलोक में इन सभी महत्वपूर्ण हिन्दीतर कवियों की परंपरा और वैचारिकता को समझने के दौरान वे लगातार और संवेदनशील, और चेतनाशील, और मनुष्यवत ही होते गये।

