और प्रेम का रहस्यमय कंकाल गाता है

1911 में अमेरिका में पैदा हुए कवि केनेथ पैटचेन के बारे में कहा जाता है कि बाद में ‘बीट पीढ़ी’ के कवियों ने उनको अपने आदर्श के रूप में अपनाया. मूलतः विद्रोही स्वभाव के इस कवि के बारे में कहा जाता है कि अपने समय में उनको ठीक तरह से समझा नहीं गया. हिंदी में उनकी कविताएँ पहली बार. अनुवाद किया है युवा कवि त्रिपुरारि कुमार शर्मा ने- जानकी पुल.
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1. सृजन
मृत जहाँ भी हैं, वे वहीं हैं और वहाँ कुछ भी नहीं है।
लेकिन तुम और मैं उम्मीद कर सकते हैं
कि घास के मैदानों में फरिश्तों को देखें
जो दिखाई देते हैं गायों की तरह –
और हम जहाँ भी हैं, स्वर्ग में हैं
सुसज्जित कमरे में, बिन नहाए हुए 
छठे आसमान पर   
क्या यही परमात्मा है! हम पढ़ते हैं
एक दूसरे के लिए स…स की आवाज़ को दुलराते हुए
चेहरों पर फिसलते हैं जो कि बहुत ही अच्छा है
हमारे सिरों पर बाल उगाने के लिए पर्याप्त हैं, रिल्के और विल्फ्रेड ओवेन की तरह
कोई भी व्यक्ति
, जो किसी दूसरे व्यक्ति से प्यार करता है,
इस दुनिया में जहाँ भी है, वह इस कमरे में हमारे साथ है –
हालांकि वहाँ लड़ाई के मैदान भी हैं।


2. नंगी ज़मीन
एक जानवर मेरी आँख पर खड़ा है
मैं अपने होश को अंधेरी आग में पकाता हूँ
पुराने गर्भ सड़ने लगते हैं और नई माँ
दुनिया के नक़्श-ए-क़दम पर चलती है
इस बिन बुलाए स्वर्ग के लोग कौन हैं?
क्या इशारा है?
इस बंज़र ज़मीन को किसका लहू पवित्र करता है?
इंसान की नींद की सतह पर क्या फिसलता है?
जानने का दूसरा पहलू…
नींद में डूबे हुए का प्रेम... शुरू करने के लिए
पर्याप्त प्रेम! हल्की चुप्पी के रूप में
आख़िरी आसमान तक।


3. शाम के तारे का गिरना
धीरे बोलो; सूरज नीचे जा रहा है
आँख से ओझल हो रहा है सूरज, अब मेरे पास आओ
जैसे परिंदों के प्यारे पंखों का नीचे गिरना  
अंधेरा घिरने के खिलाफ शिकायत करो…  
घास में हरा ख़ून भर दो;
पत्तियों के संगीत, अंतरिक्ष को खुरच रहे हैं;
एक आवाज़ से चुप्पी को बढ़ा दो;
अपने नाम के एक अक्षर से…
और सबकुछ जो छोटा है, जल्द ही विशाल हो जाए,
जो दुर्लभ है एक साधारण सौंदर्य में बढ़ता है
तुम्हारे मुँह पर, मेरे मुँह के साथ आराम करने के लिए
जैसे कहीं पर एक तारा गिरता है
और धरती बड़े प्रेम से ग्रहण करती है, प्राकृतिक प्रेम में…
ठीक वैसे ही, जैसे हम भरते हैं एक-दूसरे को बाहों में…
और सो जाते हैं…

4. बहती हवा के नक़्श-ए-क़दम में
बहती हवा के नक़्श-ए-क़दम में
आसमानी पैगम्बरी मुर्गियाँ ख़ौफ़ के कपड़े बुनती हैं

और धूँधले सफ़र में पहाड़ियों के किनारे हरे पंख फैलाती हैं।  
अपने नर्म और हल्के धक्कों में गर्त्त के कंधों पर रात
और काले लहू की एक बूँद पृथ्वी को ढाँप लेती है।
अब चलने की भावना…  

मेरे पहुंच में है।
मेरे एकत्रित इच्छाओं में एक काला अंग आवाज़ करता है
और प्रेम का रहस्यमय कंकाल गाता है।
मेरा देखना एक पौधे के नीचे भ्रमण करता है
और मृत जंगल खड़े हैं, एक बार जहां मैरी खड़ी थी।
उदास पत्थरों से बने कुत्ते पानी के झरने के नीचे प्रतीक्षा करते हैं…
हालांकि यायावर डूबता है, जैसे आग की तरह है उसका कल्याण करना
जो समंदर की गहराई में जलता है, तपता है
सोने के लिए, अंजान सड़कों पर चलने के लिए।

5. संगीत बनो, रात बनो
संगीत बनो, रात बनो
ताकि उसकी नींद चली जाए

जहाँ परियाँ धीमी आवाज़ में समूहगान करती हैं
हाथ बनो
, समंदर बनो,
ताकि उसके सपने देख सकें
तुम्हारा गाइड दुनिया के हरे मांस छू रहा है
एक आवाज बनो, आकाश बनो,
ताकि उसकी खूबसूरतियों को गिना जा सके
और सितारे उसके चेहरों की चुप्पी को चूम सकेंगे
उसकी खूबसूरती के आईने में
एक सड़क बनो, पृथ्वी बनो,
ताकि उसका चलना महसूस हो सके
जहाँ स्वर्ग के सारे शहर, अपनी साँस के शिखर को उठाते हैं
एक दुनिया बनो, एक राजसिंहासन बनो, परमात्मा बनो,
ताकि उसकी लिविंग अपना मौसम पा सके
और एक बच्चे की किताब में पुराने घंटियों की आत्मा
उसका नेतृत्व कर सकेंगे, तुम्हारे आश्चर्यजनक घर में

6. क्या मरा हुआ जान सकता है कि यह क्या समय है?
बूढ़ा आदमी ने अपनी बियर गिलास में डालते हुए 
बेटे से कहा –
(
और एक लड़की टेबल तक आ गई जहाँ हमलोग थे;
जैक क्राइस्ट से ड्रिंक खरीदने के लिए बोली)
बेटा, मैं तुम्हें कुछ बताने जा रहा हूँ
जैसा कि अबतक किसी ने, कभी भी, किसी को नहीं बताया।
(और लड़की ने कहा, मुझे आज रात कुछ नहीं मिला है;
कैसा रहेगा?मैं और तुम दोनों तुम्हारे घर चलें)
मैं तुम्हें मेरी माँ की कहानी बताने जा रहा हूँ
जिसमें वह परमात्मा से मुलाक़ात करती है।
(
और मैंने लड़की के कान में कहा – मेरे पास कमरा नहीं है,
लेकिन हो सकता है…)
वह वहाँ तक पहुंच गई, जहाँ टॉप ऑफ दि वर्ल्ड हो सकता है  
और परमात्मा वहाँ तक आया और बोला
तो आख़िरकार तुम अपने घर आ ही गई
(
लेकिन क्या हो सकता है?
मैंने सोचा कि मैं यहाँ रुकना चाहुंगी और तुमसे बात करूंगी)
मेरी मां रोने लगी और 
परमात्मा ने उसे अपनी बाहों में भर लिया।
(
किसके बारे में?
ओह! बात करते हैं… हमलोग कुछ खोज लेंगे)
माँ ने कहा – यह वैसा ही था, जैसे कोहरा चेहरे पर छा जाए

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