ज़ौक़ जा पाया नहीं दिल्ली की गलियाँ छोड़कर

  आज उस शायर की पुण्यतिथि है जिसने लिखा था ‘कौन जाए ज़ौक़ अब दिल्ली की गलियाँ छोड़कर’। उनके ऊपर…

कश्मीर, किताबें, और… पता नहीं क्या कुछ: प्रदीपिका सारस्वत

  कश्मीर की कुछ यादों के साथ प्रदीपिका सारस्वत लौटी हैं। उनके गद्य के हम सब क़ायल रहे हैं। यह…

राजीव कुमार की कहानी ‘दिल्ली की एक शाम’

  आज पढ़िए राजीव कुमार की कहानी। राजीव कुमार की कहानियाँ, कविताएँ, साहित्यिक टिप्पणियाँ हम पढ़ते रहे हैं। यह उनकी…

प्रीति प्रकाश की कहानी ‘पलाश के फूल’

  प्रीति प्रकाश तेज़पुर विश्वविद्यालय में शोधार्थी हैं। उनके लेखन से हम सब परिचित रहे हैं। यह उनकी नई कहानी…

‘अफ़ग़ानिस्तान से ‘खत-ओ-खिताबत’ का एक अंश

  राकेश तिवारी का यह दूसरा यात्रा वृत्तांत है- ‘अफ़ग़ानिस्तान से ‘खत-ओ-खिताबत’। राजकमल प्रकाशन समूह से प्रकाशित इस किताब का…

स्त्रीवाद और आलोचना का संबंध

  स्त्री विमर्श पर युवा लेखिका सुजाता की एक ज़रूरी किताब आई है ‘आलोचना का स्त्री पक्ष’। इस किताब की…

कुमाऊँ प्रवास: यही है वह दिन के जिसका वादा था

  युवा लेखिका प्रदीपिका सारस्वत ने अपने कुमाऊँ प्रवास के अनुभवों को डायरी रूप में दर्ज किया है। उसका एक…

आमाके… दाओ! आमाके…दाओ: शरतचंद्र और ‘आवारा मसीहा’

‘आवारा मसीहा’ शरतचंद्र की जीवनी है। विष्णु प्रभाकर की बरसों की तपस्या का परिणाम। इस यादगार किताब पर एक पठनीय…

‘बिसात पर जुगनू’ की काव्यात्मक समीक्षा

यतीश कुमार की काव्यात्मक समीक्षा शैली से हम सब बखूबी परिचित हैं। आज उन्होंने अपनी शैली में वंदना राग के…

विभा रानी की कहानी ‘सीता के सकल देखी’

  आज विभा रानी की कहानी पढ़िए। विभा रानी हिन्दी और मैथिली की लेखक, अनुवादक, नाट्य-लेखक, नाट्य व फिल्म कलाकार व फोक प्रेजेंटर…

जानकी पुल को सहयोग करें

Jankipul : A Bridge of World's Literature एक नयी शुरुआत! मेरा कॉलम #Jankipul के लिए " जनहित में जारी सब पर भारी" आपकी टिप्पणी की अपेक्षा रहेगी