हाल के वर्षों में दलित साहित्य में सूरज बड़त्या ने अच्छी पहचान बनाई है. आज उनकी एक कहानी आपके लिए-…
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समय से परे अपने समाज को देखने को उम्दा कोशिश
पिछले 25 साल के उपन्यास लेखन की सबसे बड़ी पहचान अलका सरावगी के नए उपन्यास ‘एक सच्ची झूठी गाथा’ पर…
सोचा ज़्यादा किया कम उर्फ एक गँजेड़ी का आत्मालाप
विमल चन्द्र पाण्डेय की की लम्बी कविता. लम्बी कविता का नैरेटिव साध पाना आसान नहीं होता. स्ट्रीम ऑफ़ कन्सशनेस की तीव्रता…
लोकप्रिय शैली में लिखी गंभीर कहानियां
आकांक्षा पारे बहुत जीवंत, दिलचस्प कहानियां लिखती हैं और वह बिना अधिक लोड लिए. इसीलिए कथाकारों की भीड़ में…
देवदत्त पटनायक की किताब ‘राम की गाथा’ का एक अंश
रामनवमी के अवसर पर देवदत्त पटनायक की किताब ‘राम की गाथा’ का एक अंश प्रस्तुत है. पेंगुइन बुक्स से प्रकाशित यह…
दाहिने की सुविधा, और वाम की दुविधा के समीक्षक डॉ.रामविलास शर्मा
आज आलोचक रामविलास शर्मा की पुण्यतिथि है. उनके अवदान को याद करते हुए विमलेन्दु का लेख- मॉडरेटर ====== रामविलास जी…
काश ऐसा समाज होता जहाँ न ख़रीदार होते न लड़कियां बिकाऊ
प्रतिष्ठा सिंह इटैलियन भाषा पढ़ाती हैं लेकिन अपने समाज से गहरा जुड़ाव रखती हैं. बिहार की महिला मतदाताओं के बीच…
धर्म जनता की अफीम है- कार्ल मार्क्स
अपने नॉर्वे प्रवासी डॉ प्रवीण झा का लेखन का रेंज इतना विस्तृत है कि कभी कभी आश्चर्य होता है. उनके…
क्या ब्रजेश्वर मदान को भुला दिया जाना चाहिए?
‘जानकी पुल’ पर शशिभूषण द्विवेदी के लिखे लेख ‘बर्बाद जीनियस थे ब्रजेश्वर मदान’ की टिप्पणी में ब्रजेश्वर मदान के भतीजे…
प्रकाश के रे की कविताएँ
कविता को हृदय का उद्घोष माना गया है। लेकिन कवि आज के दौर में घोषित रूप से निकृष्ट व्यक्ति है…



