प्रतिष्ठा सिंह इटैलियन भाषा पढ़ाती हैं लेकिन अपने समाज से गहरा जुड़ाव रखती हैं. बिहार की महिला मतदाताओं के बीच…
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धर्म जनता की अफीम है- कार्ल मार्क्स
अपने नॉर्वे प्रवासी डॉ प्रवीण झा का लेखन का रेंज इतना विस्तृत है कि कभी कभी आश्चर्य होता है. उनके…
क्या ब्रजेश्वर मदान को भुला दिया जाना चाहिए?
‘जानकी पुल’ पर शशिभूषण द्विवेदी के लिखे लेख ‘बर्बाद जीनियस थे ब्रजेश्वर मदान’ की टिप्पणी में ब्रजेश्वर मदान के भतीजे…
प्रकाश के रे की कविताएँ
कविता को हृदय का उद्घोष माना गया है। लेकिन कवि आज के दौर में घोषित रूप से निकृष्ट व्यक्ति है…
ज्योति मोदी की कविताएँ
सजग पाठिका एवम सदैव साहित्य सृजन में उन्मुख ज्योति मोदी अंग्रेजी साहित्य में स्नातक हैं। इनकी कई कविताएं राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय संकलनों…
शुरुआत ‘कुछ नहीं’ है
स्कूली लेखक अमृत रंजन इस बार बहुत दिनों बाद जानकी पुल पर लौटा है. उसकी कविताओं से हम सब भली…
बांग्ला कवयित्री मंदाक्रांता सेन की कविताएँ
आज मंदाक्रांता सेन की कविताएँ. समकालीन बांगला साहित्य में मंदाक्रांता सेन का नाम जाना-माना है. उनको आनंद पुरस्कार भी मिल…
इरशाद ख़ान सिकंदर की ग़ज़लें
असली नाम, छद्म नाम की बहसों से अलग कुछ अच्छी ग़ज़लें पढ़िए. इरशाद खान सिकंदर की गजलों की किताब आई…
ओलम्पिक के नाम डॉक्टर की चिट्ठी
आज व्यंग्यकार प्रवीण कुमार झा की चिट्ठी ओलम्पिक के नाम- मॉडरेटर ================================================ हम किस मिट्टी के बने हैं? किस चक्की…
मनीषा कुलश्रेष्ठ के उपन्यास ‘स्वप्नपाश’ का एक अंश
स्वप्नपाश का एक अंश हाल में ही मनीषा कुलश्रेष्ठ का उपन्यास आया है ‘स्वप्नपाश’. मनीषा हर बार एक नया विषय…



