आलोचना का गल्पित पाठ

संजीव कुमार ऐसे आलोचक हैं जिनकी आलोचना-भाषा सर्जनात्मक गद्य का आनंद देती है. यही लेख देखिये- है तो आलोचना की…

हाथी के पीछे भौंकते कुत्ते

हिंदी में गंभीर विमर्श का माहौल खत्म होता जा रहा है, मर्यादाएं टूटती जा रही हैं. अभी कुछ दिन पहले…

लेखन एक जागृत स्वप्न है

  राजेश जोशी के ये विचार प्रीति सिंह परिहार से बातचीत पर आधारित हैं. राजेश जोशी के लिए साहित्य हमेशा…

उनके पास ज्‍यादा काम नहीं है तभी तो लिखते हैं!

हमारे समाज, खासकर हिंदी समाज में लेखक नाम की संज्ञा अब भी कोई खास प्रभाव नहीं पैदा कर पाती, उसे…

खाकर वे सो रहे हैं जागकर हम रो रहे हैं

 ये अशोक वाजपेयी की नई कविताएँ हैं. करीब अर्ध-शताब्दी से अशोक वाजपेयी हिंदी कविता में दूसरी परम्परा की सबसे बड़ी…

कविता-आयोजनों की बहुलता ने फिर से कविता को जेरे-बहस किया है

कान्हा में प्रकृति के ‘सान्निध्य’ में कवियों के मिलन की चर्चा ने कुछ दूसरा ही रंग पकड़ लिया है. लेकिन…

राजेंद्र यादव की कहानी ‘अभिमन्यु की आत्महत्या’

आज राजेंद्र यादव ८४ साल के हो गए. राजेंद्र यादव मूलतः कथाकार हैं, ‘नई कहानी’ आंदोलन के तीन सिग्नेचर कथाकारों…

विजेंद्र नारायण सिंह का जाना एक अकेले व्यक्ति का जाना नहीं है

प्रसिद्ध आलोचक विजेंद्र नारायण सिंह को याद कर रही हैं वरिष्ठ कवयित्री रश्मिरेखा– जानकी पुल. ================================================================  हिंदी के जाने-माने आलोचक,…

जवाहरलाल नेहरु का ऐतिहासिक भाषण हिंदी अनुवाद में

14 अगस्‍त की रात संविधान परिषद, नई दिल्‍ली में दिया गया जवाहरलाल नेहरू का भाषण:  —————————————————————————————————– बहुत वर्ष हुए, हमने भाग्य से एक…

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