नियति का अर्थ है पैतृकता की पहचान

    कैलाश दहिया आजीवक विचारक हैं और अपने इस लेख में उन्होंने नियति के सिद्धांत पर विचार करते हुए…

बेगम समरु और दिल्ली का इतिहास

हाल में राजगोपाल सिंह वर्मा की किताब आई ‘बेगम समरु का सच’। संवाद प्रकाशन से आई यह किताब तथ्यात्मक इतिहास…

दिल्ली की सूफी दरगाहें और दिलों के राहत का सामान

आजकल दिल्ली में सड़कों पर दरबदर भटकते इंसान दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में दिल्ली की सूफ़ी दरगाहों की याद…

‘मुझे चाँद चाहिए’ पढ़ते हुए कुछ कविताएँ

  मुझे याद है बीसवीं शताब्दी के आख़िरी वर्षों में सुरेन्द्र वर्मा का उपन्यास ‘मुझे चाँद चाहिए’ प्रकाशित हुआ था।…

लॉकडाउन की इंग्लैंड डायरी

प्रज्ञा मिश्रा इंग्लैंड में रहती हैं और वहाँ के लॉकडाउन अनुभवों को उन्होंने दर्ज करके भेजा है। आप भी पढ़…

फ़िल्म गाइड की कहानी आर के नारायण की ज़ुबानी

अभी दो दिन पहले मैंने वहीदा रहमान से बातचीत पर आधारित नसरीन मुन्नी कबीर की किताब के हवाले से गाइड…

अनघ शर्मा की कहानी अब यहाँ से लौट कर किधर जायेंगे!

अनघ शर्मा युवा लेखकों में अपनी अलग आवाज़ रखते हैं। भाषा, कहन, किस्सागोई सबकी अपनी शैली है उनकी। यह उनकी…

दुष्यंत बहुत ही फक्कड़, उन्मुक्त लेकिन बहुत सुसंस्कृत व्यक्ति था – कमलेश्वर

दुष्यंत कुमार वरिष्ठ कथाकार कमलेश्वर के अभिन्न मित्र थे।दुष्यंत के नहीं रहने के बाद कमलेश्वर ने अपनी बिटिया ममता का रिश्ता…

सजी थी बज़्म, मगर टूट गया साज़ का तार

पं जश करण गोस्वामी एक मूर्घन्य सितार वादक थे. राजस्थान संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार एवं एम0 पी0 बिरला फाउंडेशन कला…

ईद पर सुहैब अहमद फ़ारूक़ी की ग़ज़लें

आज ईद है। मुझे कल चाँद दिखते ही ईदी मिल गई थी। भाई सुहैब अहमद फ़ारूक़ी ने अपनी ग़ज़लें ईद…

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